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युद्ध का बदल रहा स्वरूप:राजनाथ

नागपुर। (लोक निर्णय) केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नागपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री अंबाझरी (जो यंत्र इंडिया लिमिटेड – YIL की एक यूनिट है) में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर अत्याधुनिक 10,000-टन एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस के लिए भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी ज़रूरतें खुद पूरी करने में सक्षम होता है, वह अपने हितों की रक्षा के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। यह एक्सट्रूज़न प्रेस देश की उस सोच में बदलाव का प्रतीक है, जिसके तहत अब आयात पर निर्भर रहने के बजाय ज़रूरी सामान का उत्पादन देश के भीतर ही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के मकसद से, मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में सुरक्षा से जुड़ी ज़रूरतों पर अपना नियंत्रण रखना बहुत ज़रूरी है।प्रस्तावित प्रेस देश में अपनी तरह की सबसे आधुनिक सुविधाओं में से एक होगी। यह डिफेंस सिस्टम और प्लेटफॉर्म, एयरोस्पेस और एविएशन स्ट्रक्चर, मिसाइल प्रोग्राम, रेलवे और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर और अन्य रणनीतिक औद्योगिक कामों के लिए ज़रूरी बड़े और जटिल एल्युमीनियम अलॉय प्रोफाइल के निर्माण में मदद करेगी। यह प्रोजेक्ट ज़रूरी एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू सप्लाई चेन को मज़बूत करने में मदद करेगा, साथ ही देश में ही उत्पादन करके रणनीतिक सेक्टर की भविष्य की ज़रूरतों को भी पूरा करेगा।रक्षा मंत्री ने कहा कि आज, जब युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और दुश्मनों का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है, पारंपरिक युद्ध और उससे जुड़े साधन उतने ही अहम हैं जितने 1947 में थे, और 2047 में भी उनकी अहमियत वैसी ही बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि एक मज़बूत सैन्य-औद्योगिक आधार का महत्व लंबे समय तक बना रहेगा, और एक्सट्रूज़न प्रेस भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए देश की एक बड़ी ज़रूरत को पूरा करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है।देश में रक्षा उत्पादन, जो 2014 में 46,000 करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष (FY) 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि देश 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से कम कीमत के हथियार और उपकरण एक्सपोर्ट करता था, जो अब बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि भारत की क्षमताओं में विकास को दिखाता है। यह देश के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी का संकेत है। हम अगले 2-3 सालों के लिए तय किए गए लक्ष्यों – 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा एक्सपोर्ट – को समय से पहले हासिल करने के लिए तैयार हैं। नई DPSU इस दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ी हैं। OFB का प्रोडक्शन, जो कॉर्पोरेटाइजेशन से पहले के साल FY 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपये था, वह FY 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के मामले में, कॉर्पोरेटाइजेशन से पहले यह आंकड़ा सिर्फ़ 81 करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें YIL का योगदान 397 करोड़ रुपये है।”कहा कि वैश्विक स्तर पर अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज करा पाएंगी। साथ ही, उन्होंने DPSUs से बदलते समय के साथ आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी जगहों पर बेहतरीन तौर-तरीकों (बेस्ट प्रैक्टिसेज़) को समझने और अपनाने का आह्वान किया। देवेंद्र फडणवीस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘नए भारत’ की तकनीकी क्षमता और अनोखी खूबियों का एक शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि DPSUs और प्राइवेट सेक्टर के बीच बढ़ता सहयोग देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। इस मौके पर रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार; रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत; YIL के निदेशक (ऑपरेशन्स) और CMD (अतिरिक्त प्रभार) श्री विजयकुमार अय्यर; DDP और YIL के अन्य वरिष्ठ अधिकारी आदि मौजूद थे।

locnirnay@gmail.com

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