केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ श्रमिक मोर्चा का प्रदर्शन
रुद्रपुर। (लोक निर्णय)अगस्त 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं बरसी पर कॉर्पोरेट फासीवादी गुलामी से मुक्ति का आवाह्न के साथ मोदी सरकार की जन–विरोधी नीतियों के खिलाफ श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने आज आंबेडकर पार्क में प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि हमारे देश में मोदी सरकार 1930 के दशक में इटली में पैदा हुई और बाद में जर्मन में फली – फूली और लाखों यहूदियों का कत्लेआम कर देने वाली फासीवादी विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। यह फासीवादी विचारधारा पूंजीवादी व्यवस्था का सबसे क्रूर चेहरा है। पिछले 12 वर्षों में आरएसएस की नीतियों पर चलने वाली मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक संस्थानों, रेल, बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क जैसे तमाम उपक्रमों को अडानी- अंबानी के हवाले करके कॉरपोरेट गुलामी की ओर धकेल दिया है। दूसरी तरफ आक्रोशित जनता की एकता को खंडित करने के लिए अल्पसंख्यकों के प्रति घृणा, दुष्प्रचार कर उन्हें दुश्मन बताकर उन्मादी भीड़ से हत्याएं और उत्पीड़न कराना आम हो गया है। यही द्वेष और नफरत वाला रूप संवैधानिक तरीके से चलने वाले प्रशासनिक ढांचे में भी दिखने लगा है। यही जर्मन तानाशाह हिटलर और इटली के तानाशाह मुसोलिनी के शासन जैसा ही है।वक्ताओं ने कहा कि देश के श्रम कानून, कृषि कानून, आपराधिक कानून व संविधान में तक पूंजीपतियों के पक्ष में संशोधित किया जा रहा है और एक आमजन विरोधी कानूनी मॉडल खड़ा किया जा रहा है। ताकि आंदोलन करने वाले श्रमिकों, किसानों, आदिवासियों , छात्रों, युवाओं व आमजन को दंडित कर उनके लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को छीना जा सके।वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने मजदूर पक्षीय 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताएं बना दी है। जिनके बल पर मालिक मजदूरों से कम वेतन पर ज्यादा काम कराएगा और उनके यूनियन बनाकर के अधिकार को भी छीना जा रहा है। राज्य की धामी सरकार ने 2 दिन पहले इन चारों श्रम संहिताओं को अधिनियमित करके प्रदेश में कार्यरत लाखों मजदूरों को पूंजीपतियों की गुलामी की ओर धकेल दिया है। उन्होंने मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं को खत्म करने, अमेरिका से एफटीए समझौते रद्द किए जाएं, 42000 रुपये न्यूनतम वेतन करने, सभी श्रमिकों को पीएफ–ईएसआई के दायरे में लन, किसानों को उनकी फसल का सी2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाया जाए, दमनकारी कानूनों को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी सीएसटीयू के केंद्रीय महासचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र से शहर सचिव कैलाश भट्ट,मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान से दिनेश चंद, ऐक्टू की जिला सचिव अनीता अन्ना, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केन्द्रीय महासचिव नरेश नौटियाल, समाजवादी लोक मंच के गिरीश आर्या, बैंक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष समीर राय,आईसा के प्रदेश सचिव धीरज कुमार, भाकपा (माले) से रंजन विश्वास, नारायण महाजन, विजय शर्मा, केहरी सिंह,बजाज ऑटो लिमिटेड से संदीप कुमार, पंजाब बेबल्स इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, भगवती इम्प्लाइज यूनियन से लोकेश पाठक, प्रमोद फुलारा, सूरज बोरा शामिल थे।





