चंपावत में स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट पर कैसे उठा सवाल?
चम्पावत। (लोक निर्णय)जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने एक समाचार पत्र में 35 वर्षीय एक महिला की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वास्तव में उक्त महिला की जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट 19 अप्रैल की है, जबकि उसी महिला की एक निजी लैब से कराई गई जांच रिपोर्ट दो मई की है। इस प्रकार दोनों की रिपोर्ट के बीच स्पष्ट रूप से समय का अंतराल है। जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पैथोलॉजी जांच रिपोर्टों में समय का अंतराल एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक होता है। यदि किसी मरीज की जिला अस्पताल में कराई गई प्रारंभिक जांच के एक-दो सप्ताह पश्चात किसी अन्य लैब से पुनः जांच कराई जाती है और उसमें रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो इसे पूर्व रिपोर्ट में त्रुटि मानना उचित नहीं है। यह परिवर्तन मरीज द्वारा लिए जा रहे उपचार, संतुलित आहार एवं पर्याप्त जल सेवन के कारण संक्रमण में आए सुधार का परिणाम हो सकता है।उन्होंने कहा कि विभिन्न समय पर कराई गई जाँच रिपोर्टों की तुलना करते समय चिकित्सीय परिस्थितियों और उपचार के प्रभाव को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।अतः केवल रिपोर्टों के अंतर के आधार पर किसी एक जांच को पूर्णतः गलत ठहराना तकनीकी रूप से उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने अवगत कराया कि इस संबंध में अब तक कोई प्रमाणिक एवं लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में इस विषय में कोई ठोस साक्ष्य अथवा शिकायत प्राप्त होती है, तो उसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनपद के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णतः जनहित में तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं।उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी मरीज या परिजन को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, जाँच रिपोर्ट अथवा किसी कर्मचारी के व्यवहार को लेकर कोई संशय या असुविधा हो, तो वे सीधे संबंधित अस्पताल प्रशासन या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर अपनी समस्या दर्ज कराएं, ताकि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।




