किसानों से कृषि विविधीकरण अपनाने का आह्वान
पंतनगर।( लोक निर्णय) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के चार-दिवसीय किसान मेले का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह रविवार को गांधी हाल में हुआ। मुख्य अतिथि सांसद, नैनीताल-ऊधम सिंह नगर एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, रक्षा एवं पर्यटन अजय भट्ट,। विशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य किसान आयोग सुरेन्द्र सिंह नामधारी एवं प्रबंध परिषद के सदस्य एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, गन्ना विभाग के राज्य मंत्री मंजीत सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, निदेशक प्रसार शिक्षा, डा. जितेन्द्र क्वात्रा मंचासीन थे। सांसद भट्ट ने कहा कि कृषि क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय एवं कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। भट्ट ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय हरित क्रांति की आधारशिला रखने वाले प्रमुख संस्थानों में रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत बीज, नई तकनीक एवं अनुसंधान का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन एवं कृषि विविधीकरण अपनाकर आय बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने धरती को ‘धरती मां’ बताते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन एवं भोजन सीधे मिट्टी से जुड़ा है। इसलिए भूमि की उर्वरता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। श्री भट्ट ने किसान मेले के सफल आयोजन के लिए कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप सहित पूरे विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी और कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में देश को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
उत्तराखंड राज्य किसान आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुरेंद्र सिंह नामधारी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी भी बनें। आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के किसान की समृद्धि ही भारत के विकास को नई गति प्रदान करेगी। श्री नामधारी ने कहा कि पंतनगर विष्वविद्यालय ने देश के कृषि विकास में महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने किसान मेले को किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि उद्योगों के बीच ज्ञान, तकनीक एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विकसित उन्नत बीज, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का लाभ किसानों के खेतों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं से कृषि को आधुनिक एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों की मांग पर किसान मेले की अवधि बढ़ाने के लिए सरकार को पत्र भेजने की बात कही। राजेश शुक्ला ने कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण धुरी है। विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा, शोध एवं तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से किसानों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किसान मेले की बढ़ती लोकप्रियता और हर वर्ष नए रिकॉर्ड बनना विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता एवं किसानों के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्रमुख चुनौतियों में पलायन एवं गांवों का निर्जन होना शामिल है। ऐसे में कृषि को रोजगार एवं आय का प्रभावी माध्यम बनाना आवश्यक है। मातृृशक्ति को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर देते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्रों एवं वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। श्री शुक्ला ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों ने समर्पण बनाए रखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप के नेतृत्व में विश्वविद्यालय नई ऊंचाईयां हासिल करेगा।
कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा पंतनगर किसान मेला किसी एक व्यक्ति का आयोजन नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कर्मचारियों, कृषि विज्ञान केंद्रों, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि टीम भावना, कर्तव्यनिष्ठा और सामूहिक प्रयास ही बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान करने की शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रति वर्षों से बना विश्वास और जुड़ाव मेले की सबसे बड़ी विशेषता है। बिहार के पश्चिमी चंपारण से आए किसानों ने 22 वर्षों से लगातार मेले में शामिल होने की जानकारी दी, जो विश्वविद्यालय और किसानों के मजबूत संबंध को दर्शाता है। कुलपति ने बताया कि इस वर्ष किसानों की बीज आवश्यकता को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने तीन शिफ्टों में कार्य करते हुए बीज प्रसंस्करण किया। मेले से पूर्व पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक बीज तैयार किया गया, जिससे किसानों को पर्याप्त बीज उपलब्ध कराया जा सका। डा. कश्यप ने कहा कि किसान मेला अब केवल कृषि तकनीक एवं उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों और कृषि उद्योग के बीच संवाद, तकनीकी आदान-प्रदान और व्यवसाय का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। डॉक्टर जितेन्द्र क्वात्रा ने बताया कि इस वर्ष किसान मेले में लगभग पौने दो लाख लोगों का आगमन हुआ।
मुख्य अतिथि द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठान के लिए मैसर्स बिहानी इंटरनेशनल प्रा.लि., रुद्रपुर तथा सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए मैसर्स मनराज एग्रो इंडस्ट्रीज, गदरपुर पंजाब के प्रतिनिधियों को प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया गया तथा महिला क्लब पंतनगर को बेस्ट समूह का पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर किसान मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं स्टालों के विजेताओं को भी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला एवं महिला क्लब की अध्यक्षा रेणू कश्यप ने कहा कि किसान मेले में क्लब द्वारा अर्जित धनराशि का प्रयोग सामाजिक उत्थान के लिए चैरिटी के रुप में खर्च किया जाता है। इस अवसर पर वैज्ञानिकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। अंत में निदेशक शोध, डा. एस.के. वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किसान मेले के सफल आयोजन के लिए सहयोग देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने मेले में उमड़ी भारी भीड़ को व्यवस्थित एवं नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सुरक्षा विभाग तथा मेले में साफ-सफाई की व्यवस्था बनाये रखने के लिए सफाई विभाग का भी विशेष रूप से बधाई दी।





