शोध को बूस्टर डोज देने को पंत विवि का बड़ा फैसला
पंतनगर। (लोक निर्णय) शोध परियोजनाओं को गति देने के लिए विवि प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है।इससे शोध के लिए बजट का व्यवधान पैदा नहीं होगा,साथ ही लैब भी हाईटेक होंगी।गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों से जुड़ी करीब ढाई सौ परियोजनाएं संचालित होती हैं। अभी तक क्रय समितियों को सामग्री खरीदने के लिए ढाई लाख रुपये की अनुमति थीं।इससे परियोजनाओं को रफ्तार देने में दिक्कत होती थी। अब इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर शोध कार्यों को गति देने और प्रयोगशालाओं को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित करने की दिशा में विवि प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2025 के अनुरूप खरीद समितियों के माध्यम से होने वाली खरीद प्रकिया में संशोधन करते हुए नया कार्यालय आदेश जारी किया गया है।वर्तमान में क्रय समिति के माध्यम से किए जा क्रय कार्यों में समिति के गठन की स्वीकृति नियंत्रक के माध्यम से कुलपति से स्वीकृति जरूरी है।क्रय समिति में तीन सदस्य होंगे। समिति पांच लाख रुपये तक की खरीद कर सकेगी।बिना क्रय दल के की जा सकने वाली सीधी ख़रीद की सीमा भी 25 हज़ार से बढ़ा कर 50 हज़ार कर दी गई है।इस नई व्यवस्था लागू होने से शोध से जुड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक उपकरणों और सामग्री की खरीद प्रक्रिया तेज होगी। इससे शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को समय पर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे और अनुसंधान कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि खरीद सीमा बढ़ने से बजट संबंधी व्यवधान कम होंगे और विभिन्न विभागों को बार-बार प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे अनुसंधान परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इस निर्णय से विश्वविद्यालय में चल रहे वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोगशाला आधारित अध्ययन और नवाचार गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फैसले से परियोजना संचालित करने वाले वैज्ञानिक उत्साहित नजर आ रहे हैं।साथ ही बूस्टर डोज के रूप में देख रहे हैं। कुलपति डॉक्टर शिवेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि ढाई लाख से बढ़ा कर पांच लाख रुपये तक लैब के उपकरण या अन्य सामग्री खरीदने का निर्णय लिया गया है और इसका आदेश भी 19 जून को जारी कर दिया गया है।इससे विवि में संचालित परियोजनाओं को गति मिलेगी।





