मांगों को लेकर श्रमिक गरजे
रुद्रपुर। (लोक निर्णय)ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) की आज जिला काउंसिल की बैठक हेड मास्टर निशान सिंह भवन में हुई बैठक में मांगों पर चर्चा की गई। ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री केके बोरा ने कहा कि मजदूर वर्ग बड़ी उम्मीद के साथ केंद्र सरकार की ओर देख रहा था कि उनके वेतन में बढ़ोत्तरी की जाएगी। लेकिन मोदी सरकार लगातार मजदूर वर्ग की उपेक्षा कर रही है और मजदूरों के शोषण को बढ़ावा देने और पूंजीपतियों का हित साधने वाले 4 लेबर कोड मजदूरों पर थोप रही है। इस बीच गैस संकट और बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों का गुस्सा पूरे देश में फूट रहा है। मोदी सरकार उनकी मांगे मानने के बजाए मजदूरों का दमन–उत्पीड़न कर रही है। पिछले दिनों मानेसर, गुरुग्राम, नोएडा सहित तमाम औद्योगिक इलाकों में मजदूरों पर हुए लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां निंदनीय है। कहा कि जब महंगाई चरम पर है, शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरी तरह निजीकरण हो गया है, तब हमारे ट्रेड यूनियन ऐक्टू की मांग है कि सरकार के वेतन नापने के फार्मूले के अनुसार न्यूनतम वेतन 42 हजार प्रतिमाह होनी चाहिए।ऐक्टू जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि सरकार हर छह माह में बढ़ने वाले महंगाई भत्ते (वीडीए )को रोके हुए है। यह महंगाई भत्ता जनवरी में लागू हो जाना चाहिए था।। लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद वीडीए जारी नहीं किया गया है। यदि जल्दी जारी नहीं होता है तो ऐक्टू इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगा।ऐक्टू की जिला सचिव अनिता अन्ना ने कहा कि संगठन जल्द ही रुद्रपुर और सितारगंज में नगर सम्मलेन करेगा और मजदूर आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।
आशा वर्कर्स पर सरकार लगातार काम का बोझ बढ़ा रही है लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दे रही है। सरकारी विभागों के तहत काम करने वाली स्कीम वर्कर्स चाहे वो आशा हो, आंगनबाड़ी हो या भोजनमाता, सभी सरकार द्वारा किए जा रहे शोषण से परेशान है। जिले भर में चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के आंदोलन की मांगों मानते हुए सरकार को उनके वेतन में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए।बैठक में ललित मटियाली, रीता कश्यप, मोहन बिष्ट, हीरा सिंह राठौर, रुदल प्रसाद, प्रकाश नेगी, उत्तम दास, धीरज कुमार आदि काउंसिल सदस्य उपस्थित थे।





