उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर कारोबार खेती/किसानी नेशनल न्यूज़ शिक्षा शोध/आविष्कार स्वास्थ्य

राज्यपाल ने किसानों से क्वांटम कम्प्यूटिंग अपनाने का आह्वान किया

पंतनगर। (लोक निर्णय) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शनिवार को शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रिटायर्ड लेज. गुरमीत सिंह ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी,पंत विवि के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा एवं निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा उपस्थित थे।मेले के उद्घाटन के पश्चात विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को विभिन्न महाविद्यालयों, नवाचार आधारित स्टाल और स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाये गये विभिन्न उत्पादों के स्टाल का अवलोकन कराया गया। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि 21वीं सदी की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को किसान के खेत तक पहुंचाना होगा। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और देश को कृषि उत्पादकता के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। राज्यपाल ने पंतनगर विश्वविद्यालय की इस भूमि को नमन करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी जंगलों और वन्यजीवों से कृषि क्षेत्र में परिवर्तित किया गया, उसमें किसानों और पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है कहा कि यह आयोजन वैज्ञानिक, किसान, युवा, उद्यमिता और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्यपाल ने कहा कि पंतनगर विष्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब समय आ गया है कि विवि कृषि के माध्यम से ‘फूड सरप्लस’ के बाद ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में कार्य करे। उन्होंने कृषि क्षेत्र में तीन प्रमुख क्रांतियों की आवश्यकता बताते हुए हनी क्रांति, अरोमा क्रांति और श्रीअन्न (मिलेट्स) क्रांति पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक शहद, सुगंधित एवं औषधीय फसलों तथा मिलेट्स के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्यपाल ने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक से दूरी बनाने के बजाय किसानों को उसके साथ मित्रता करनी चाहिए। उन्होंने हनुमान जी की विशाल सोच और भगवान गणेश के गुणों का उदाहरण देते हुए किसानों को बड़ी सोच के साथ कृषि में परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को मजबूत करना होगा। वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध का वास्तविक लाभ तब है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर किसान के खेत तक पहुंचे। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को स्थानीय कृषि समस्याओं के समाधान का केंद्र बनाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि आधुनिक किसान को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, बाजार, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की जानकारी भी प्राप्त करनी होगी। उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन तथा ड्रोन तकनीक को अपनाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि खेत में नवाचार, किसान के हाथ में तकनीक, स्थानीय उत्पादों को बाजार और गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड और भारत के विकास की राह खेतों से होकर गुजरती है। उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों, युवाओं और उद्यमियों से कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब वैज्ञानिक तकनीक और शोध किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने ‘लैब टू लैंड’ की भावना को मजबूत करने तथा कृषि वैज्ञानिकों के किसानों से नियमित संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बागवानी, हाई डेंसिटी एप्पल, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मोटे अनाज जैसी फसलों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोदा-झंगोरा जैसे पारंपरिक अनाजों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसानों के लिए नए अवसर विकसित किए जा सकते है।उन्होंने कुलपति डॉक्टर शिवेंद्र कुमार कश्यप की कार्यशैली और सकारात्मक सोच की तारिफ की।कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सार्थक माना जाएगा, जब विकसित तकनीक एवं उसके परिणाम किसानों के खेत तक पहुंचें और उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। कुलपति ने कृषि में इंटीग्रेशन मॉडल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कृषि की विभिन्न गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़कर किसानों को अधिक लाभ पहुंचाया जा सकता है। खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों को जोड़कर किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कृषि की नवीन तकनीकों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक कृषि उपकरण तथा क्वांटम तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में हो रहे विकास का प्रभाव भविष्य की कृषि पर भी पड़ेगा। ऐसे में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इन नवीन तकनीकों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में केवल उत्पादकता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन लागत को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना होगा, जो किसानों के लिए उपयोगी, व्यावहारिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी हों।
प्रारम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा द्वारा बताया गया कि मेले में 560 से अधिक स्टाल लगे हैं और इस वर्श 40 से 50 हजार कृषकों की मेले में आने की संभावना है। लगाये गये स्टालों में कृषि यंत्र, जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्प एवं सब्जी की नवीन प्रजातियाँ, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली, तथा स्मार्ट कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा घरेलू उत्पादों जैसे जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बडियाँ, तथा हस्तशिल्प सामग्रियों का प्रदर्शन किया गया है।
अंत में निदेशक शोध डा. एसके वर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्यों का विमोचन किया गया।गांधी हाल में वीसीएजी उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार, पौढ़ी गढ़वाल के कुलपति डा. भगवती प्रसाद भट्ट, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, जिला प्रशासन के अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अधिष्ठाता, निदेशकगण, संकाय सदस्य, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, षिक्षक, अधिकारी एवं विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधि ने प्रतिभाग किया।

locnirnay@gmail.com

locnirnay@gmail.com

About Author

You may also like

शोध/आविष्कार

फलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित पॉलीथिन को बाय बाय करेगा नेचुरल फाइबर बैग

लोक निर्णय, पंतनगर: फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उनके उत्पाद की बेहतर कीमत मिल
शिक्षा

तीन भाषाओं में पढ़ाने पर शिक्षिका मंजू बाला को मिलेगा पुरस्कार

लोक निर्णय,रुद्रपुर: कहते है कि यदि कुछ करने का जज्बा हो तो हर मंजिल खुद कदम चूमती है।इसी जज्बे और