हरेला जनआंदोलन बने, प्रकृति संरक्षण जीवन का संकल्प : राज्यपाल
पंतनगर। (लोक निर्णय) उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहा कि हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन बनना चाहिए। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गांधी हॉल में आज आयोजित हरित यज्ञ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है और पर्यावरण संरक्षण हमारी सांस्कृतिक, नैतिक व आध्यात्मिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, वनाग्नि, ग्लेशियरों के पिघलने और जैव विविधता पर बढ़ते संकट का उल्लेख करते हुए प्रत्येक परिवार से कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही प्रधानमंत्री के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने की अपील की।
राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 और विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाए बिना संभव नहीं है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय से ‘ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0’ का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विज्ञान, जल संरक्षण, कार्बन प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक शोध किसानों तक पहुंचे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा 50 हजार पौधरोपण के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि पौधे लगाने के साथ उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के पांच पूर्व छात्रों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए विश्वविद्यालय से एमओयू करने पर सम्मानित किया तथा ड्रैगन फ्रूट की खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए किसान अनूप मौर्य को प्रशस्ति पत्र और 1.25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की। कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने विश्वविद्यालय की कृषि अनुसंधान एवं नवाचार में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हरेला महोत्सव के तहत विश्वविद्यालय, अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों और गोद लिए गए गांवों में 50 हजार पौधों का रोपण एवं संरक्षण किया जाएगा। कार्यक्रम में आरएसएस के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र सहित प्रशासनिक अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, किसान और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।





