राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले उत्तराखंड भाजपा में राजनीतिक सरगर्मी तेज
देहरादून। (लोक निर्णय) उत्तराखंड में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रस्तावित दौरे से पहले प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अपने आवास पर लोकसभा सांसद अनिल बलूनी,पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के साथ बैठक की।राजनीति जानकारों के अनुसार पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही इसे लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले प्रदेश इकाई में एकजुटता का संदेश देना चाहता है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुछ दिन पहले सांसद अनिल बलूनी पूर्व कैबिनेट मंत्री और गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय के आवास पर आए थे।मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विधायक पाण्डेय के आवास पर आए थे और डमरू बजाया था और उन्होंने मीडिया के समक्ष प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे।हाल के दिनों में प्रदेश भाजपा में गुटबाजी और बयानबाजी की खबरों के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।अगले साल विधानसभा चुनाव होने है।ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक के कई मायने निकाल रहे हैं।हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास कार्यों की सराहना भी की जा रही है।धामी की जनता और राजनीतिक में अच्छी पकड़ हैं।राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे थे कि क्या प्रदेश की राजनीति में नई रणनीति पर काम चल रहा है? या फिर यह महज राजनीतिक शिष्टाचार था?यह भी चर्चा है कि भाजपा अब केवल वर्तमान राजनीति नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक बिसात को भी ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ दूरी पर हो, लेकिन राजनीतिक दलों में चुनावी तैयारी और रणनीतिक समीकरण समय से पहले ही बनने शुरू हो जाते हैं।उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में नेतृत्व, क्षेत्रीय संतुलन, संगठन और जनाधार वाले नेताओं की भूमिका चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे को लेकर संगठनात्मक मजबूती, आगामी कार्यक्रमों की रणनीति और सरकार-संगठन के बीच तालमेल को लेकर बड़ा संदेश दिया जा सकता है। ऐसे में दौरे से पहले शीर्ष नेताओं की लगातार बैठकों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।हालांकि भाजपा की ओर से इसे सामान्य बैठक माना जा सकता है। अब सभी की नजरें राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे और उसके बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं।





