वाद विवाद के विजेता सम्मानित
पंतनगर। यूवा 2026 के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय अंतर-विश्वविद्यालय वाद–विवाद प्रतियोगिता ‘उद्भव’ का यह चरण उसी बौद्धिक यात्रा का शिखर था।, जहां युवा मन केवल उत्तर नहीं खोज रहा था,बल्कि वह स्वयं को गढ़ रहा था।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में विवेकानन्द स्वाध्याय मण्डल के तत्वावधान में आयोजित ‘उद्भव’ का समापन एक गहन वैचारिक चेतना और बौद्धिक संतोष के साथ संपन्न हुआ।दूसरे दिन जैसे ही सत्र प्रारंभ हुए, सभागार में एक अलग ही आत्मविश्वास और उत्साह महसूस किया गया।प्रतियोगिता का केंद्रीय विषय था— “क्या डिजिटल अर्थव्यवस्था भारतीय युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम है?” इस प्रश्न ने पूरे आयोजन को दिशा दी। देश के विभिन्न राज्यों से आए 43 विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों वर्गों में इस विषय के पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किए। प्रत्येक वक्ता ने अपने अनुभव, अध्ययन और सामाजिक दृष्टि के आधार पर विषय को नए आयाम दिए।
विषय के पक्ष में वक्ताओं ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को युवाओं के लिए अवसरों का द्वार बताया। स्टार्टअप संस्कृति, गिग इकॉनमी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल नवाचार और वैश्विक बाज़ार तक पहुँच—इन सभी को उन्होंने आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। विशेष रूप से यह बात उभरकर सामने आई कि डिजिटल माध्यमों ने छोटे शहरों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया है।वहीं विपक्ष में वक्ताओं ने डिजिटल असमानता, तकनीकी कौशल की कमी, अस्थायी रोजगार की प्रकृति, सामाजिक सुरक्षा के अभाव और साइबर चुनौतियों जैसे गंभीर पक्षों को सामने रखा। उनका मत था कि जब तक डिजिटल सुविधाएँ और प्रशिक्षण समान रूप से सभी युवाओं तक नहीं पहुँचते, तब तक डिजिटल अर्थव्यवस्था युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सकती। इन तर्कों ने विषय को केवल समर्थन या विरोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाधान-केन्द्रित विमर्श की ओर अग्रसर किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में युवा नेताओं के उत्कृष्ट योगदान के 19वें संस्करण का संकलन एक पुस्तिका के रूप में भी जारी किया गया। निखिलेश जी ने VSM टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों को नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत करने और विषय पर केंद्रित रहने की सलाह दी।विषम्भर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विषय स्वयं भगवान के समान होता है और वक्ता उसका भक्त होता है। वक्ता का दायित्व केवल बोलना नहीं, बल्कि विषय की गरिमा को समझते हुए उसे शुद्ध, सटीक और भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना होता है।इसके पश्चात प्रतियोगिता के हिंदी एवं अंग्रेज़ी वर्गों के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।बोहितेश मिश्रा, सह-संस्थापक ने प्रौद्योगिकी के साथ-साथ युवाओं के निरंतर विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को रचनात्मक प्रतिक्रिया दी और उन्हें कुशल डेटा संग्रहण और विश्लेषण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया।अंग्रेजी में टीम पुरस्कार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इमान अख्तर और जीशान परवेज ने जीता। अंग्रेजी वाद-विवाद में विजेता गौरांगी मेहता, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर रहीं। उपविजेता पुरस्कार सानिया शब्बीर सोहेरवर्डी, शेर-ए-कश्मीर विश्वविद्यालय, कश्मीर को मिला और प्रथम सांत्वना सक्षम छाबड़ा और अंशू पांडे, जीबी पंत विश्वविद्यालय को मिला। दूसरी सांत्वना अंशू तिवारी, राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर को मिली। सर्वश्रेष्ठ खंडन क्रमशः नाशिका रियात, एसकेयूएएसटी. कश्मीर को और मौखिक संचार हंसिका सक्सेना को और गैर मौखिक संचार क्रमशः एसजीआरआर देहरादून और महात्मा ज्योतिभा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय से लवी सिंह को मिला। सर्वश्रेष्ठ सामग्री का पुरस्कार वनस्थली विद्यापीठ की रिया त्यागी को दिया गया
हिंदी वर्ग में टीम पुरस्कार बनस्थली विद्यापीठ की प्राची शर्मा और साक्षी यादव ने जीता। विजेता पुरस्कार जामिया मिलिया इस्लामिया के फैजान मुर्शिल को मिला, जबकि उपविजेता पुरस्कार एस.के.यू.ए.एस.टी. कश्मीर की विनीका पंडित को दिया गया। प्रथम सांत्वना पुरस्कार जीबीपीयूएटी की भूमिका भट्ट और जेएनयू, दिल्ली के शशांक शेखर मिश्रा को क्रमशः मिले। सर्वश्रेष्ठ प्रतिवाद का पुरस्कार प्रेक्षा रावत (जीबीपीयूएटी) को मिला, जबकि मौखिक एवं गैर-मौखिक संचार का पुरस्कार बनारस हिंदी विश्वविद्यालय के हर्षित श्रीवास्तव और गुजरात के दरदार वल्लभ भाई पटेल विश्वविद्यालय के अतुल कुमार को मिला। सर्वश्रेष्ठ विषयवस्तु का पुरस्कार हेमावती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, गढ़वाल के आयुष सिंह को मिला।
दो-दिवसीय इस राष्ट्रीय वाद–विवाद प्रतियोगिता के समापन पर यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भारतीय युवाओं के लिए संभावनाओं और चुनौतियों—दोनों को साथ लेकर आती है।इस पूरे संवाद में यह स्पष्ट हुआ कि वाद–विवाद केवल अपनी बात रखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सुनने, स्वीकारने और स्वयं को पुनः परिभाषित करने की यात्रा भी है। ‘उद्भव’ के इस चरण में विचार केवल टकराए नहीं—वे परिपक्व हुए, विस्तृत हुए और चेतना में परिवर्तित हो गए।
‘उद्भव’ जैसे मंच युवाओं को केवल उत्तर देने के लिए नहीं, बल्कि सही प्रश्न गढ़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। यूवा 2026 के अंतर्गत आयोजित यह प्रतियोगिता उस विचार यात्रा का प्रतीक बनी, जहाँ युवा तर्क से चेतना तक और चेतना से जिम्मेदारी तक का मार्ग तय कर रहे थे।




