उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर शिक्षा

मुख्यमंत्री धामी ने ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में गिनाईं विकास योजनाएं

देहरादून।(लोक निर्णय)मुख्यमंत्र पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को एक होटल में आयोजित ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान हुए विकास कार्यों, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, महिला सशक्तिकरण, पलायन रोकने, पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा राज्य की सांस्कृतिक पहचान एवं मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 35 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में चयनित होने का अवसर मिला है। इन भर्तियों में सामान्य परिवारों के बेटे-बेटियों को बिना किसी सिफारिश, भ्रष्टाचार अथवा नकल के अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता स्थापित करने के साथ ही सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में मातृशक्ति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरता है। वे परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ खेती-बाड़ी, पशुपालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी योगदान को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर और भागीदारी मिले तथा वे आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। इन समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को एक व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें सिलाई-बुनाई, मिलेट आधारित उत्पाद, पूजा सामग्री, त्योहारों से संबंधित उत्पाद, स्थानीय वस्त्र, हस्तशिल्प एवं स्मृति चिह्न सहित अनेक उत्पाद शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं के उत्पाद गुणवत्ता और कीमत के लिहाज से बड़े-बड़े बहुराष्ट्रीय ब्रांडों को भी प्रतिस्पर्धा देने की क्षमता रखते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े। इसी दिशा में पर्यटन, स्वरोजगार, होमस्टे, होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, बागवानी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आदि कैलाश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय लोगों को होमस्टे, होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में स्टार्टअप की संख्या पहले लगभग 700 थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,200 हो गई है। इसी प्रकार होमस्टे की संख्या लगभग 4 हजार से बढ़कर 8 हजार से अधिक हो गई है। होटल व्यवसाय और पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी निरंतर विस्तार हो रहा है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसमें इकोलॉजी और इकोनॉमी को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना गया है। विकास कार्यों के साथ प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। उत्तराखंड में ऐसा विकास सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहे।राज्य में विकास और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता केवल नारों और घोषणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के कार्यों और परिणामों के आधार पर अपना निर्णय लेती है। लोकतंत्र में जनता पांच वर्षों के कामकाज का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता जागरूक और विवेकशील है। सरकार के लिए विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, देवभूमि की पवित्रता और मूल पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार का संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, समृद्ध और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा उत्तराखंड सौंपा जाए।

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