टीबी मुक्त चंपावत के लिए डीएम मनीष ने की समीक्षा
चम्पावत।(लोक निर्णय)भारत सरकार एवं उत्तराखण्ड सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद चम्पावत में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने आज जिला कार्यालय सभागार में 100 डेज टीबी मुक्त कैंपेन की समीक्षा बैठक कर अभियान की प्रगति, टीबी मरीजों की पहचान, उपचार, पोषण सहायता तथा जनजागरूकता गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की।उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से उपचार योग्य बीमारी है। यदि समय पर इसकी पहचान और उपचार हो जाए तो मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकता है। डीएम मनीष ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि टीबी के संभावित मरीजों की जल्द पहचान कर उनका तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी पात्र व्यक्ति को जांच और उपचार से वंचित न रखा जाए। जनपद में उपलब्ध एक्स-रे मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने, स्क्रीनिंग और जांच की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाकर अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, जिला क्षय रोग अधिकारी को निर्देशित किया कि टीबी मरीजों के लिए निक्षय पोषण किट की व्यवस्था सुनिश्चित कीरने को कहा।जिससे उपचार के दौरान मरीजों को आवश्यक पोषण सहायता मिल सके।जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए जनपद में सभी विभागों एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से अभियान को जनआंदोलन का रूप दिए जाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से गांव स्तर तक जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने तथा लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने को कहा।बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सोनाली मंडल ने बताया कि जनपद में निक्षय मित्र योजना का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। इसके लिए टीबी पीड़ितों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से शिविर आयोजित कर टीबी मरीजों के संपर्क में आए लोगों तथा संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी जांच कर रही हैं। जनपद के गांवों को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा सर्वेक्षण, स्क्रीनिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त सघन टीबी स्क्रीनिंग एवं टेस्टिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिससे संभावित मरीजों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जा सके।बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट यतिन, मेडिकल ऑफिसर डीटीसी डॉ. विनय यादव सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



