उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर शिक्षा शोध/आविष्कार

केंद्र शैक्षणिक विकास में होगा सहायक

रुद्रपुर।सरदार भगत सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं देवभूमि विचार मंच के सहयोग से राजा रुद्रचन्द अध्ययन केन्द्र का शुभारम्भ किया गया।कार्यक्रम की संयोजक और हिंदी विभाग की डॉ बसुन्धरा उपाध्याय ने बताया कि यह अध्ययन केन्द्र शोधार्थी एवं विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में सहायक होगा।इसके माध्यम से हम सम समायिक विषयों पर प्रकाश डालेंगे।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य अवधेश नारायण सिंह ने की। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संयोजक उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश भगवती प्रसाद राघव की रहीं।अतिथियों को भगवत गीता एवं अंगवस्त्र भेंट की गई।कार्यक्रम प्रस्तावना डॉ शिल्पी अग्रवाल ने प्रस्तुत की। उर्मिला पिंचा जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाती हैं।हमें विरासत को साथ लेकर कार्य करना होगा।मुगलकाल और अंग्रेजी शासनकाल ने भारतीय ज्ञान व संस्कृति का नाश कर दिया। स्किल डेवलपमेंट भी
हमारी पुरातन ज्ञान प्रणाली में समाहित था।हमारी परम्परा हमारे देश समाज और प्रकृति से जुड़ी है।मौखिक परम्पराएं हमारे जीवन का हिस्सा हैं।भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है।कहा कि हमारी सभ्यता में महिलाओं को पूजा जाता है।हम वो हैं, जो पुस्तकों को जलाते नहीं,बल्कि नमन करते हैं। उनमें वर्णित सार को आत्मसात कर समाज को नई दिशा देते हैं। प्रोफेसर सतेंद्र राजपूत, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार ने शोधकार्य को बढ़ावा देने के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।सरकार के द्वारा दी जाने वाली सहायता सम्बधी योजनाओं से अवगत कराया। भारतीय ज्ञान परम्परा में शोध के बहुत से अवसर हैं।महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि हमारी परम्पराओं का सरक्षण होना चाहिए।इसका दायित्व हमारा है और भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर महाविद्यालय भी आगामी समय कार्य करेगा। जो सेवानिवृत्त हो जाते हैं, उन्हें भी साथ लेकर हम अपनी इन परम्पराओं को बचा सकते हैं।भगवती प्रसाद राघव ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह एक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप है।प्रवाह का अर्थ है आगे बढ़ना अर्थात ज्ञान को आगे बढ़ाना। जो संस्थायें कार्य कर रही हैं प्रज्ञा प्रवाह उनका सहयोग कर रही है। प्रश्न खड़े करना बहुत सरल है, परंतु उसका समाधान ढूढ़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारी परम्परा में बचत जीवन का हिस्सा रही है। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी परिवार गुल्लक लाकर देते हैं,मगर वहीं बचत उस परिवार के काम आती है।वर्तमान में चुनौती तो बहुत हैं वैश्विक चुनौतियों का हम सामना कैसे करें।आज लोक परम्परा को शिक्षण संस्थानों के माध्यम से फिर से लोक तक ले जाना। इस मौके पर प्रोफेसर दीपा वर्मा,प्रो. भरत राजपूत,प्रो शैलजा जोशी,प्रो.सर्बजीत यादव, प्रो. आशा राणा, प्रो मनोज पांडेय, प्रो राघवेंद्र मिश्रा, डॉ मुन्नी जोशी,डॉ.कमला बोरा,डॉ गरिमा जायसवाल, अभिषेक गुप्ता,तरुण प्रजापति,सरबजीत कौर आदि मौजूद थे।।संचालन डा.प्रकाश जोशी ने किया।

locnirnay@gmail.com

locnirnay@gmail.com

About Author

You may also like

शोध/आविष्कार

फलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित पॉलीथिन को बाय बाय करेगा नेचुरल फाइबर बैग

लोक निर्णय, पंतनगर: फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उनके उत्पाद की बेहतर कीमत मिल
शिक्षा

तीन भाषाओं में पढ़ाने पर शिक्षिका मंजू बाला को मिलेगा पुरस्कार

लोक निर्णय,रुद्रपुर: कहते है कि यदि कुछ करने का जज्बा हो तो हर मंजिल खुद कदम चूमती है।इसी जज्बे और