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पंतनगर किसान मेले में पहली बार बीजों पर 15 प्रतिशत की छूट, स्मार्ट खेती से स्टार्टअप तक दिखेगा नई कृषि दुनिया

पंतनगर।( लोक निर्णय)गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्विद्यालय में किसान मेले में पहली बार बीजों पर 15 प्रतिशत की छूट मिलेगी।यहीं नहीं, पारंपरिक, प्राकृतिक,जैविक खेती की जानकारी मिलेगी।साथ ही विवि में विकसित तकनीक, शोध और स्टार्टअप के लिए अलग से पंडाल लगाए जाएंगे।जहां पर लोग इसका लाभ उठा सकेंगे पंत विवि के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने बताया कि तीन से छह अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष किसान मेले की थीम ‘स्मार्ट खेती, स्वस्थ धरती, समृद्ध किसान’ है। मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज, कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक, कृषि स्टार्टअप तथा पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस किसान मेले में लगभग बड़े एवं छोटे कुल 400 से अधिक स्टॉल लगाए जाने की सम्भावना है। स्टॉलों के माध्यम से किसानों को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी नवीन तकनीकों, उत्पादों, कृषि यंत्रों, बीजों तथा उपयोगी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। गेहूं, मक्का, मटर, तिलहनी फसलों सहित विभिन्न फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। निदेशक शोध डॉक्टर एसके वर्मा ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में उपरोक्त फसलों का डेढ़ गुना अधिक प्रजनक बीज तैयार किया गया है। गेहूं की विभिन्न प्रजातियों का 2039 क्विंटल, जौ का 5 क्विंटल, मसूर का 50 क्विंटल, चना का 26 क्विंटल और तिलहन का 100 क्विंटल प्रजनक बीज के अतिरिक्त उद्यान एवं वानिकी वृक्षों के पौध तथा सब्जियों के विभिन्न फसलों के बीज उपलब्ध रहेंगे। इनके मूल कीमत पर 15 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म डॉक्टर आरपी सिंह ने बताया कि गेहूं की विभिन्न प्रजातियों का 2040 कुंतल बीज तैयार किया गया है जो कि आधारीय बीज, प्रमाणित बीज और टीएल बीज के रुप में उपलब्ध कराया जाएगा। बताया कि इस बार मेले में तीन विशेष स्टाल यथा शोध आधारित नवोन्मेशी, पारम्परिक खेती की विधियों एवं बीजों के संरक्षण तथा एग्री-स्टार्टअप पर लगाये जाएंगे। इसमें कृषि क्षेत्र के नवाचारों, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। किसानों को उन्नत किस्मों, प्रमाणित बीजों और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नवीन विकल्पों से भी परिचित कराया जाएगा। कुलपति डॉक्टर एसके कश्यप ने बताया कि किसान मेला केवल कृषि उत्पादों एवं तकनीकों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह किसानों, वैज्ञानिकों, युवाओं, उद्यमियों और कृषि संस्थानों के बीच संवाद तथा तकनीक हस्तांतरण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शोध केंद्रों द्वारा विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन और संवाद की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को खेतों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को कृषि आधारित रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना भी है। मेले का 3 अक्टूबर को।पूर्वाह्न 11 बजे राज्यपाल, उत्तराखण्ड शुभारंभ करेंगे।
पत्रकार वार्ता का संचालन निदेशक संचार, डा. जेपी जायसवाल ने किया। इस मौके पर मुख्य महाप्रबंधक, विश्वविद्यालय फार्म, डा. आरपी. सिंह, निदेशक शोध डा. एसके वर्मा, संयुक्त निदेशक श्रम कल्याण डा. बृजेश सिंह, प्राध्यापक, मौसम विज्ञान डा. एएस नैन, डा. अरविन्द त्यागी, डा. अजय कुमार, सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता काण्डपाल आदि मौजूद थे।

locnirnay@gmail.com

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