कोयले से देश में रोशनी, राख से हरियाली, 2047 तक 240 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
अरविंद कुमार सिंह,लोक निर्णय
कोरबा। कोयले से बिजली बनाने वाले संयंत्र की पहचान अब सिर्फ धुएं और राख तक सीमित नहीं है। राख के इस्तेमाल से लेकर उजड़े क्षेत्रों को हरित क्षेत्र में बदलने तक की तस्वीर एनटीपीसी कोरबा में देखने को मिली। सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत पीआइबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में 13 सदस्यीय पत्रकारों का दल 16 सितंबर को एनटीपीसी का भ्रमण कर ऊर्जा उत्पादन, तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन की व्यवस्थाओं को करीब से जाना।एनटीपीसी कोरबा में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कार्यकारी निदेशक केसी पात्रा ने बताया कि एनटीपीसी की मौजूदा विद्युत उत्पादन क्षमता करीब 91 गीगावाट है। कंपनी का लक्ष्य इसे वर्ष 2037 तक 150 गीगावाट और देश की आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 तक 240 गीगावाट तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती मांग के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जा रही है।लगातार छठे साल सर्वाधिक पीएलएफ 2600 मेगावाट क्षमता वाले एनटीपीसी कोरबा संयंत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 87.71 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (PLF) दर्ज किया। यह एनटीपीसी के सभी स्टेशनों में लगातार छठे वर्ष सर्वाधिक पीएलएफ रहा। संयंत्र ने इसी अवधि में 94.85 प्रतिशत घोषित क्षमता और 95.33 प्रतिशत ऑन-बार उपलब्धता दर्ज की।कोरबा संयंत्र की इकाइयों के लगातार संचालन का रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय रहा। यूनिट-7 ने 455 दिन, जबकि यूनिट-1 ने 495 दिन लगातार संचालन किया। अधिकारियों ने बताया कि कोरबा स्टेज-1 की तीनों इकाइयां एनटीपीसी की लंबे समय तक लगातार संचालित इकाइयों में शामिल हैं।भ्रमण के दौरान पर्यावरण संरक्षण की पहल ने पत्रकारों का विशेष ध्यान खींचा। चारपारा ऐश डाइक के पुनर्वासित क्षेत्र में 4.5 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। कभी राख के निस्तारण से जुड़ा यह क्षेत्र अब हरियाली का रूप ले चुका है। अधिकारियों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोरबा ने 60.71 लाख मीट्रिक टन राख का उपयोग किया।पत्रकारों ने देश के बिजली उत्पादन, विकास,रोजगार,पर्यावरण,स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे एनटीपीसी के योगदान की बारीकियों को देखा_समझा।भ्रमण के दौरान पत्रकार एनटीपीसी के योगदान को लेकर काफी उत्साहित दिखे।
पीआइबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल ने कहा कि मीडिया एक्सपोजर टूर का उद्देश्य पत्रकारों को केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास परियोजनाओं की जमीनी तस्वीर से सीधे जोड़ना है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए ऊर्जा उत्पादन के साथ सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन की तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है। भ्रमण के दौरान महाप्रबंधक एस. बहरा और एचआर हेड शशि शेखर मौजूद थे।





