पंत विवि फिर बनेगा बीज उत्पादन का बड़ा केंद्र, उत्तराखण्ड बीज निगम को देगा 133 हेक्टेयर में आधारीय बीज
पंतनगर। (लोक निर्णय) गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के साथ अपने पुराने बीज उत्पादन संबंधों को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। देहरादून में 6 अगस्त को आयोजित उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम की बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न फसलों की प्रजातियों के आधारीय बीजों का विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादन कर उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम को उपलब्ध कराया जाएगा। पंत विवि के कुलपति प्रो. (डा.) शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने आज वीसी सभागार में पत्रकारों को बताया कि पंतनगर की पहचान देश-विदेश में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए रही है और अब इस पहचान को और मजबूत करने के लिए उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम की आगामी रबी मौसम में गेहूं की पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्र के संस्तुत प्रजातियों के बीज उत्पादन का 25 प्रतिशत विष्वविद्यालय द्वारा उत्पादित कर उपलब्ध कराया जाएगा। 86 हेक्टेयर में गेहूं, 25 हेक्टेयर में मसूर, 2 हेक्टेयर में चना तथा 10 हैक्टेयर में अन्य फसलों आधारीय (फाउन्डेशन) बीज विश्वविद्यालय द्वारा पैदा कर उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम को उपलब्ध कराया जाएगा। अंशधारी किसानों की सहभागिता उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के साथ बीज उत्पादन में पूर्ववत् बनी रहेगी। वर्तमान में विष्वविद्यालय द्वारा विभिन्न फसलों की प्रजातियों का लगभग 7000 कुंतल प्रजनक बीज प्रतिवर्ष उत्पादित किया जा रहा है जिसका प्रयोग देश की कई राज्यों द्वारा किया जा रहा है।कुलपति ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पंतनगर और उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के बीच बीज उत्पादन एवं आपूर्ति के पुराने मॉडल को पुनर्जीवित करना तथा पंतनगर को पुनः बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य की विभिन्न फसलों की बीज एवं पौध सामग्री की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विष्वविद्यालय के अनुसंधान केन्द्रों और फार्म के अधिकारियों के साथ दो चरणों में विचार-विमर्श किया जा चुका है और आवश्यक रणनीति तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के सुदृढ़ीकरण के लिए विश्वविद्यालय हरसंभव सहयोग करेगा तथा राज्य की बीज एवं पौध आवश्यकताओं की पूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक प्रगति के बारे में बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और विभिन्न पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों को भरने के लिए शीघ्र ही स्पॉट राउंड आयोजित किया जाएगा। कुलपति ने बताया कि 18 अगस्त से सभी महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को भी शीघ्र ही विश्वविद्यालय में शामिल किया जाएगा। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में 15-दिवसीय ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 1,000 प्रथम वर्ष के विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, अनुसंधान केन्द्रों, प्रयोगशालाओं एवं अन्य सुविधाओं से परिचित कराया जा रहा है, ताकि वे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को समझने के साथ-साथ अपने चार वर्षीय शैक्षणिक जीवन और भविष्य के करियर के लिए बेहतर दिशा निर्धारित कर सकें। पत्रकार वार्ता का संचालन निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल द्वारा किया गया और इस अवसर पर सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता काण्डपाल मौजूद थे।





