786.73 करोड़ के मास्टर ड्रेनेज प्लान को मिली मंजूरी
रुद्रपुर। (लोक निर्णय) लंबे इंतजार के बाद रुद्रपुर के बहुप्रतीक्षित मास्टर ड्रेनेज प्लान को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली व्यय वित्त समिति ने करीब 786.73 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके साथ ही शहर में आधुनिक जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। प्रथम चरण में 441.79 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य शुरू किया जाएगा।रुद्रपुर शहर में हल्की बारिश के बाद भी मुख्य बाजार, गांधी पार्क, गल्ला मंडी, कलेक्ट्रेट क्षेत्र, खेड़ा, जगतपुरा, ट्रांजिट कैंप तथा अन्य निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बन जाती है। नगर निगम प्रत्येक वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई पर लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन पुरानी और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा था। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए एक वैज्ञानिक एवं आधुनिक मास्टर ड्रेनेज प्लान की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।सिंचाई विभाग ने जीआईएस आधारित स्टॉर्म वाटर मास्टर ड्रेनेज सिस्टम के तहत रुद्रपुर सहित अन्य शहरों के लिए 1857.23 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की थी। व्यय वित्त समिति ने परीक्षण के बाद इसमें आवश्यक संशोधन करते हुए रुद्रपुर के लिए 786.73 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी दी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।महापौर विकास शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण की 441.79 करोड़ रुपये की योजना में शहर के जोन एक और जोन दो के कार्यों पर 184.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिन्हें प्रथम प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं जोन तीन और जोन चार के लिए 255.38 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को द्वितीय प्राथमिकता में शामिल किया गया है।उन्होंने बताया कि मास्टर ड्रेनेज प्लान के तहत शहर के 23 मौजूदा प्रमुख नालों का चौड़ीकरण, गहरीकरण और पुनर्निर्माण कर उनकी जल निकासी क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा 20 नए प्रमुख नालों तथा 41 अन्य महत्वपूर्ण नालों का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार कुल 61 नए ड्रेनेज चौनल विकसित होंगे। योजना में लगभग 67 किलोमीटर लंबे सेकेंड्री ड्रेनेज नेटवर्क का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे शहर के प्रत्येक क्षेत्र का वर्षा जल मुख्य नालों तक पहुंच सकेगा।
मास्टर ड्रेनेज प्लान के तहत शहर को चार जोन में विभाजित कर वैज्ञानिक आधार पर जल निकासी तंत्र विकसित किया जाएगा। योजना में 23 मौजूदा प्रमुख ड्रेन जिनकी कुल लंबाई 21.90 किलोमीटर है, उनका उन्नयन किया जाएगा। इसके अलावा 20 नए प्रमुख ड्रेन 31.02 किलोमीटर, 41 अन्य महत्वपूर्ण ड्रेन 33.70 किलोमीटर तथा 67 किलोमीटर लंबा सेकेंड्री ड्रेनेज नेटवर्क विकसित होगा। पूरे सिस्टम के संचालन के लिए पांच पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे।





