मासूमों के दर्द में थाने पहुंचे कुलपति, बोले—विवि एक परिवार, पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ा हूं
पंतनगर। (लोक निर्णय)गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय परिसर में तीन मासूम बच्चियों के साथ कथित अश्लील हरकत की घटना ने पूरे विश्वविद्यालय परिवार को झकझोर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप खुद पंतनगर कोतवाली पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और पुलिस अधिकारियों से आरोपित के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। इससे पहले आक्रोशित लोगों ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग और बाद में पंतनगर कोतवाली पहुंचकर प्रदर्शन किया तथा आरोपित की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। कुलपति के थाने पहुंचने से पीड़ित परिवारों को यह भरोसा मिला कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
पुलिस ने पीड़ित परिवारों की तहरीर पर विश्वविद्यालय के वेटरनरी विभाग में कार्यरत ठेकाकर्मी दीपक शर्मा निवासी जवाहर नगर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपित बाइक से फूलबाग क्षेत्र के आसपास खेल रही तीन मासूम बच्चियों के पास पहुंचा और टॉफी का लालच देकर उनके साथ कथित अश्लील हरकत की। बच्चियों ने घर पहुंचकर पूरी घटना परिजनों को बताई। इसके बाद परिजनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आरोपित की जानकारी जुटाई और पुलिस को सूचना दी। पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच कार्रवाई का भरोसा दिया। घटना के बाद कुलपति प्रो. डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय उनके लिए केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक परिवार है। परिवार के किसी भी सदस्य के साथ अन्याय या दुखद घटना होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन उसके साथ पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि बच्चियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगा।कुलपति की इस संवेदनशील पहल की विश्वविद्यालय परिसर और स्थानीय लोगों ने सराहना की। लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाना और थाने पहुंचकर स्वयं कार्रवाई की पैरवी करना यह संदेश देता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। कुलपति चाहते तो खुद थानाध्यक्ष को अपने दफ्तर बुलाकर कार्रवाई के लिए बोल सकते थे।लेकिन उन्होंने पीड़ितों से मिलने खुद पहुंच गए थे। ऐसा देखने को नहीं मिलता है।





