उत्तराखंड

पलायन रोकने एवं ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए 10 स्थानों पर संग्रहण केंद्र स्वीकृत

चंपावत।(लोक निर्णय) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप चम्पावत को एक मॉडल जनपद के रूप में स्थापित करने और ‘आदर्श चम्पावत’ की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।इसी क्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा जनपद में पलायन को रोकने, ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक विशेष मुहिम की शुरुआत की गई है।इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत ग्रामोत्थान परियोजना के तहत संग्रहण केंद्र (Collection Centre) निर्माण के लिए जनपद के 10 महत्वपूर्ण स्थानों पर सरकारी भूमि स्वीकृत की गई है, जो क्षेत्र के चहुंमुखी विकास में मील का पत्थर साबित होगी।आदर्श चम्पावत’ के इस विजन को गति देने के लिए इन नवनिर्मित संग्रहण केंद्रों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपी जाएगी।इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय कृषि, बागवानी, दुग्ध, मसाला एवं अन्य क्षेत्रीय उत्पादों का व्यवस्थित संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन सुनिश्चित किया जाएगा। इस सुदृढ़ व्यवस्था से न केवल स्थानीय उत्पादों को एक बेहतर, संगठित और बड़ा बाजार उपलब्ध होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह प्रयास अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा और उत्तराखंड सरकार के सीमांत क्षेत्रों के विकास के संकल्प को पूरा करेगा।जिलाधिकारी की इस त्वरित और अभिनव पहल के फलस्वरूप स्वीकृत भूमि में से चार संग्रहण केंद्रों का निर्माण जनपद के चारों विकासखंड मुख्यालय परिसरों में सफलतापूर्वक पूर्ण भी किया जा चुका है।इसके अतिरिक्त, लोहाघाट विकासखंड के डैसली एवं किमतोली तथा चम्पावत विकासखंड के चंदनी, बनबसा, नायकखेड़ा, टनकपुर, अमोड़ी और खलकड़िया में भी आगामी संग्रहण केंद्रों के सुचारू निर्माण हेतु जिला प्रशासन द्वारा उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध करा दी गई है, जिससे विकास की मुख्यधारा समाज के अंतिम छोर तक पहुँच सके।

यह आधुनिक सुविधा चम्पावत आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को समस्त आवश्यक विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ हमारे पारंपरिक स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए एक मुख्य मंच बनेगी, जिससे स्थानीय समुदाय के लिए अतिरिक्त आजीविका के नए और बेहतर अवसर सृजित होंगे।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के संदर्भ में जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने स्पष्ट किया कि माननीय मुख्यमंत्री जी की सोच हमेशा से ही उत्तराखंड की मातृशक्ति को सशक्त और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की रही है।

इन संग्रहण केंद्रों के माध्यम से स्थानीय स्तर के उत्पादों के लिए एक सुगठित और आधुनिक विपणन व्यवस्था विकसित होने जा रही है, जिससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनके कड़े परिश्रम और उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे, जो सीधे तौर पर युवाओं के हो रहे पलायन को रोकने में अत्यंत मददगार साबित होंगे।
जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह है कि ग्रामोत्थान परियोजना के सशक्त माध्यम से पूरे जनपद के भीतर मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को निरंतर सुदृढ़ किया जाए। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाली प्रत्येक सामग्री को एक व्यापक और पारदर्शी बाजार से जोड़ा जा रहा है ताकि महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सके और चम्पावत देश के सामने ‘आदर्श जनपद’ का एक अनूठा उदाहरण पेश कर सके।

locnirnay@gmail.com

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