चंपावत को आदर्श और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ते कदम
चंपावत।(लोक निर्णय)उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसे ग्राम पुनेठी की रहने वाली ज्योति रसयारा ने जब अपने कदम आगे बढ़ाए, तो उनके साथ बदलाव की एक नई सुबह की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड को देश का अग्रणी व आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए, ज्योति ने गांव की अन्य महिलाओं को साथ लेकर ‘आंचल’ स्वयं सहायता समूह (SHG) का गठन किया। इस समूह में कुल 7 महिलाएं शामिल हैं, और इन सभी के दिलों में कुछ अलग करने और अपने पैरों पर खड़े होने का एक अटूट जज्बा है।इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री की ‘लोकल फॉर वोकल’ की सोच को अपनाते हुए अपनी पारंपरिक कला ‘ऐपन’ को अपनी ताकत बनाया।ऐपन, जो उत्तराखंड की लोक संस्कृति और समृद्ध विरासत की पहचान है, उसे इन महिलाओं ने सिर्फ चौखटों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया बना दिया।आंचल समूह की सबसे खास बात यह है कि इसकी हर एक महिला पूरी तरह से सक्रिय है।समूह में कोई भी खाली नहीं बैठता, बल्कि हर बहन हर समय कुछ न कुछ रचनात्मक कार्य में जुटी रहती है। उनकी इसी कड़ी मेहनत और कलात्मकता का नतीजा है कि आज यह समूह हर महीने 12 से 15 हजार रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर रहा है। यह कमाई सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि इन महिलाओं के चेहरों की मुस्कान और उनके बढ़ते आत्मविश्वास में साफ झलकती है, जो सीधे तौर पर राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को प्रमाणित करती है।इनकी इस प्रतिभा और मेहनत को पंख लगाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की दूरदर्शी नीतियों, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सहयोग ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत इस समूह को एक बड़ा राज्यस्तरीय मंच मिला, जिसके अंतर्गत ये महिलाएं जगह-जगह अपने स्टॉल लगाती हैं और लोगों तक अपने खूबसूरत ऐपन प्रोडक्ट्स पहुंचाती हैं।इन स्टॉल्स के माध्यम से उनके काम को न केवल नई पहचान मिली, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री में भी भारी बढ़ोतरी हुई, जिससे महिलाओं के आर्थिक सुदृढ़ीकरण को नया संबल मिला।सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि जिले के अधिकारियों ने भी सरकार की मंशा के अनुरूप इन बहनों के हुनर को सराहा और उनका हौसला बढ़ाया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार और एपीडी इस समूह के कार्यों से इतने प्रभावित हुए कि वे खुद इन महिलाओं से उत्पाद खरीदकर स्थानीय कला को बढ़ावा दे रहे हैं।प्रशासनिक स्तर पर मिलने वाले इस सीधे सहयोग और सराहना ने आंचल समूह की महिलाओं का मनोबल आसमान पर पहुंचा दिया है। ज्योति रसयारा और आंचल समूह की ये 7 महिलाएं आज पुनेठी गांव ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए मुख्यमंत्री के ‘सशक्त बहना, समृद्ध राज्य’ के सपने की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं, जिन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, राज्य सरकार का साथ हो और हाथों में हुनर हो, तो आत्मनिर्भरता की राह बेहद आसान हो जाती है।




