आइआइएम काशीपुर में कारपोरेट रणनीति में हो रहे बदलाव पर मंथन
काशीपुर। (लोक निर्णय) आइआइएम काशीपुर में इसके प्रमुख प्रबंधन सम्मेलन ‘दिशा में उद्योग जगत के वरिष्ठ पेशेवरों, रणनीतिक निर्णयकर्ताओं और प्रबंधन विशेषज्ञों ने कॉर्पोरेट रणनीति में हो रहे बदलावों, बाजार की बदलती परिस्थितियों और संगठनात्मक परिवर्तन आदि पर मंथन किया गया। “पुरानी व्यवस्था पर विचार: जब सब कुछ सही चल रहा हो, तब संगठनों को बदलाव कब करना चाहिए?” विषय पर परिचालन स्थिरता, रणनीतिक नवाचार, कार्यबल अनुकूलन और तकनीकी नेतृत्व के बीच संतुलन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। आइआइएम काशीपुर के पूर्व छात्र एवं नीनओपल इंक. के वरिष्ठ एसोसिएट कंसलटेंट ध्रुव चौधरी ने सत्र का संचालन किया। इसके बाद “बाजार में पिछड़ने से पहले लाएं सकारात्मक परिवर्तन: बदलते बाजार परिदृश्य में बढ़त बनाए रखने के उपाय” विषय पर दूसरा पैनल सत्र में बिक्री, विपणन, प्रौद्योगिकी, जीसीसी नेतृत्व और रणनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। पैनल में इस बात पर विचार किया गया कि आधुनिक व्यवसाय बदलते बाजार रुझानों का पूर्वानुमान लगाकर किस प्रकार अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत कर सकते हैं और दीर्घकालिक बाजार नेतृत्व बनाए रख सकते हैं। ध्रुव चौधरी, वरिष्ठ एसोसिएट कंसलटेंट, नीनओपल इंक. ने कहा कि करिश्मा सिंगला, वैश्विक प्रमुख (डेटा एंड एनालिटिक्स मैनेज्ड सर्विसेज), बीएनवाई ने कहा, “पहले कुछ लोग टेक्निकल होते थे और कुछ लोग डोमेन एक्सपर्ट। लेकिन आज के समय में आपको टेक्नोलॉजी की समझ होने के साथ-साथ अपने डोमेन में भी माहिर होना पड़े। अमित खन्ना, सेल्स उपाध्यक्ष, डीएस ग्रुप ने कहा, “बाजार में आ रहे बड़े व्यवधानों (Disruptions) को भांपने के लिए धरातल से मिलने वाले संकेतों को समय रहते समझना बेहद जरूरी है। राहुल अग्रवाल, सूचना प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष, मेकमायट्रिप ने कहा, “हम बाज़ार में आने वाले व्यवधानों (Disruptions) को किसी चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि विकास और बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखते हैं। मेकमायट्रिप (MMT) में हमारे खोज एल्गोरिदम (Search Algorithms) उपभोक्ता व्यवहार और उनकी प्राथमिकताओं का विश्लेषण करते हैं, जिससे बाज़ार में आ रहे बदलावों के संकेत स्वतः मिल जाते हैं। कोविड महामारी के दौरान शून्य बिक्री या फिर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चिप्स व रैम की भारी कमी जैसी विषम परिस्थितियों में भी हमने परिचालन रोकने के बजाय ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’ के सिद्धांत को अपनाया; क्योंकि समय रहते त्वरित रणनीतिक निर्णय लेकर ही संकट को विकास के अवसरों में बदला जा सकता है।





