देहरादून में होगी एकीकृत पर्यावरण क्षमता निर्माण कार्यशाला
देहरादून।पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून की ओर से पर्यावरणीय क्षमता निर्माण कार्यशाला कराने की अहम पहल की शुरुआत की गई है। यह मॉडल अप्रैल में देहरादून में कराया जाएगा। जिसमें उद्योगों, शिक्षा, नीति निर्माताओं को एक साझा मंच पर साथ लाया जाएगा ताकि पर्यावरण से जुड़ी पूरी क्षमता विकसित की जा सके और पर्यावरण के सही प्रबंधन को औद्योगिक विकास से जोड़ा जा सके।इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर में पायलट प्रयास के अंतर्गत पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए नियमों के पालन को लेकर क्षमता विकास कार्यशाला का आयोजन हुआ।जिसे उत्तराखंड के बड़े इंडस्ट्रियल स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर कराया गया। इस ‘कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यशाला’ का उद्देश्य – उद्योग, शिक्षा जगत, सलाहकारों और नीति निर्माताओं को एक ही साझा मंच पर साथ लाना है।जिससे पर्यावरण के सही प्रबंधन को औद्योगिक विकास से जोड़ा जा सके।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून के अपर निदेशक डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि पर्यावरण से जुड़ी सभी क्षमताओं को मिलाकर विकसित करना (एकीकृत पर्यावरणीय क्षमता निर्माण कार्यशाला) का यह मॉडल मार्च माह में देहरादून में बड़े स्तर पर कराया जाएगा और आगे पूरे देशभर में कराने की योजना है।
आईआईएम काशीपुर में आयोजित हुए राज्य स्तरीय पर्यावरणीय क्षमता निर्माण कार्यशाला में 210 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कैंपस में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिए गए। आइआइएम काशीपुर में डीन (डेवलपमेंट) और ऑपरेशंस मैनेजमेंट और डिसीजन साइंसेज के प्रोफेसर, प्रोफेसर कुणाल के. गांगुली ने लगातार नॉलेज-शेयरिंग प्लेटफॉर्म के महत्व पर ज़ोर दिया और इस क्षेत्र में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्री-एकेडेमिया-रेगुलेटर के जुड़ाव को इंस्टीट्यूशनल बनाने पर ज़ोर दिया। डॉ. आशुतोष गौतम द्वारा मॉडरेट किए गए पैनल डिस्कशन में कई ज़रूरी मुद्दों पर बात की गई। जिसमें बदलती ज्यूडिशियल स्क्रूटनी के संदर्भ में वायलेशन केस को हैंडल करना शामिल था।





