जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर जिलाधिकारी का फोकस, सारा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
चम्पावत।(लोक निर्णय) जिलाधिकारी मनीष कुमार ने आज जिला सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जनपद में संचालित सारा परियोजनाओं, प्राकृतिक धारे-नौलों के संरक्षण तथा जल स्रोतों के पुनर्जीवन कार्यों की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गय डिप्टेश्वर, गौड़ी तथा कालसन भोलेश्वर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। कालसन भोलेश्वर परियोजना के अंतर्गत कुल स्वीकृत धनराशि को लघु सिंचाई एवं वन विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से व्यय करने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने डिप्टेश्वर क्षेत्र में छोटे-छोटे चेकडैमों के निर्माण के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही कालसन भोलेश्वर परियोजना एवं गौड़ी नदी संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत चौकुनीबोरा, राकड़ीफूलारा, मुड़ियानी तथा खर्ककार्की क्षेत्रों में कार्यों में तेज़ी लाने के निर्देश दिए।उन्होंने जनपद में वर्षा आधारित नदी उपचार गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि चिन्हित कुल 83 नौलों एवं धारों के पुनर्जीवन हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त निर्माण एवं विकास कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त पारंपरिक जल स्रोतों का चिन्हीकरण कर उनके पुनर्जीवन की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने वन विभाग को निर्देशित किया कि जंगलों में ऐसे जल स्रोतों का चिन्हीकरण कर जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की जाएं, जहां सामान्यतः वन्यजीव पानी पीने आते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी लाई जा सके।साथ ही सभी अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए गए।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस. खाती, जिला विकास अधिकारी दिनेश दिगारी, सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विमल कुमार सूठा, एसडीओ वन सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।





