जंगली मक्का एवं टियोसिंटे के संकरण से उन्नत चारा मक्का प्रजातियों का विकास, पंतनगर विश्वविद्यालय की अनूठी उपलब्धि
पंतनगर । (लोक निर्णय) पशुधन की उत्पादकता बनाए रखने एवं उसमें वृद्धि के लिए पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक चारे की उपलब्धता आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिक विगत एक दशक से अधिक समय से मक्का की जंगली प्रजातियों एवं टियोसिंटे के उपयोग से उन्नत चारा मक्का प्रजातियों के विकास पर अनुसंधान कर रहे हैं। इस नवाचार के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय ने मक्का एवं टियोसिंटे के संकरण से तीन उन्नत संकर चारा मक्का प्रजातियों, पंत संकर चारा मक्का-1, पंत संकर चारा मक्का-2 तथा पंत संकर चारा मक्का-3 का विकास किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, इस अवधारणा पर आधारित संकर प्रजाति विकसित करने की दिशा में यह एक विशिष्ट उपलब्धि है। इनमें से दो प्रजातियों का विमोचन हो चुका है तथा वे भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित हैं, जबकि तीसरी प्रजाति के विमोचन एवं अधिसूचना की प्रक्रिया प्रगतिरत है।इन प्रजातियों का उद्देश्य अधिक उत्पादन, लंबे समय तक हरापन बनाए रखने तथा गुणवत्तायुक्त चारा उपलब्ध कराने की दिशा में किसानों को बेहतर विकल्प प्रदान करना है। प्रजातियों के विकास के साथ-साथ उनके संकर बीज का बड़े पैमाने पर उत्पादन, बीज उत्पादन तकनीक का परिष्करण तथा व्यावसायीकरण भी महत्वपूर्ण है। इस दिशा में विवि के वैज्ञानिकों ने निरंतर अनुसंधान के माध्यम से संकर बीज उत्पादन तकनीक विकसित की है और इन प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने फसल अनुसंधान केन्द्र स्थित मक्का प्रजनन एवं बीज उत्पादन प्रायोगिक प्रक्षेत्र का भ्रमण कर चारा मक्का की उन्नत संकर प्रजातियों के विकास, अनुसंधान कार्यों तथा संकर बीज उत्पादन की प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। कुलपति ने परियोजना के अंतर्गत किए जा रहे अनुसंधान कार्यों, उन्नत संकर मक्का प्रजातियों के विकास तथा कृषि अनुसंधान में प्राप्त प्रगति की सराहना की।इस अवसर पर मक्का प्रजनक डा. एन.के. सिंह ने मक्का की जंगली प्रजातियों एवं टियोसिंटे के उपयोग से विकसित संकर चारा मक्का प्रजातियों तथा उनसे संबंधित अनुसंधान कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। डा. जे.पी. जायसवाल, विभागाध्यक्ष, अनुसंधान एवं पादप प्रजनन विभाग एवं निदेशक संचार ने संक्षिप्त में पादप प्रजनन विभाग की प्रमुख उपलब्धियों से कुलपति को अवगत कराया। इस अवसर पर बीज उत्पादन प्रभारी श्री समीर चतुर्वेदी तथा श्री शिवेन्द्र सिंह चौहान भी उपस्थित रहे।कुलपति द्वारा अनुसंधान कार्यों की सराहना एवं वैज्ञानिकों की टीम का उत्साहवर्धन किए जाने से वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिला। उनका मार्गदर्शन चारा मक्का की उन्नत प्रजातियों के विकास, गुणवत्तायुक्त संकर बीज उत्पादन तथा अनुसंधान परिणामों को किसानों तक पहुंचाने के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।





