कुलपति डॉ.कश्यप ने जनजातीय समुदायों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने पर दिया जोर
पंतनगर। (लोक निर्णय)गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के डा. रतन सिंह सभागार में रविवार को आयोजित आदिग्राम लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह की अध्यक्षता पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति डा. आचार्य बालकृष्ण ने की। मुख्य अतिथि पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसके कश्यप, कार्यवाहक अधिष्ठाता, पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय डा. एससी त्रिपाठी, निदेशक प्रसार शिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा, डा. आर.के. सिंह एवं कर्नल अमित बिष्ट मंचासीन थे।आदिग्राम परियोजना की उपलब्धियों तथा जनजातीय समुदायों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। पतंजलि परिवार द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, जैविक खेती एवं योग को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए हैं। कुलपति डा. एसके कश्यप ने कहा कि किसान मेला किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे मेले में प्रदर्शित तकनीकों एवं नवाचारों की जानकारी प्राप्त कर उन्हें अपनी खेती में अपनाएं। आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।डा. आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि आदिग्राम परियोजना के अंतर्गत लगभग 17 हजार जनजातीय परिवारों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें जियो-टैग एवं डिजिटल रूप से दर्ज किया गया है। 5,000 से अधिक किसानों तथा 15,000 से अधिक लोगों को आजीविका एवं कौशल प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 1,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा गया। प्रतिभागियों को डिजिटल कृषि, मोबाइल एप, जैविक खेती, हस्तशिल्प, मशरूम उत्पादन एवं अन्य स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। पतंजलि प्रतिनिधियों ने पंतनगर विश्वविद्यालय के साथ कृषि, बागवानी एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र में प्रमाणित बीज एवं पौध सामग्री उपलब्ध कराने तथा उत्पादों के संभावित बाय-बैक मॉडल पर सहयोग की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम में ग्राम प्रधानों एवं लाभार्थी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें जैविक खेती, हस्तशिल्प उत्पादों के ऑनलाइन विपणन और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। इस अवसर पर ग्राम प्रधानों एवं लाभार्थी महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।





