उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर कारोबार

एआइ से बदली गांव की तकदीर: उत्तराखण्ड की पहली स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी बनी मधुबन गोशाला

रुद्रपुर/बाजपुर। उत्तराखण्ड के ऊधम सिंह नगर जनपद में IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रही है। विकासखण्ड बाजपुर की ग्राम पंचायत हरसान स्थित मधुबन गोशाला आज राज्य की पहली एआइ आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी के रूप में पहचान बना चुकी है। दानू स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित यह डेयरी आधुनिक तकनीक, महिला सशक्तिकरण और वैज्ञानिक पशुपालन का सफल मॉडल बनकर उभरी है।
मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के निर्देशन तथा परियोजना निदेशक, डीआरडीए हिमांशु जोशी एवं जिला परियोजना प्रबंधक ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के मार्गदर्शन में जिले में आजीविका संवर्धन, महिला उद्यमिता और सामुदायिक उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी पहल के तहत मधुबन गोशाला को 10 लाख की लागत से स्मार्ट डेयरी के रूप में विकसित किया गया। जिसमें छह लाख परियोजना सहायता, तीन लाख बैंक ऋण और एक लाख स्वयं सहायता समूह का अंशदान शामिल है।परियोजना के तहत समूह की महिलाओं को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, डिजिटल रिकॉर्ड संधारण, मोबाइल एप संचालन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पशु स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। गोशाला के प्रत्येक पशु के गले में स्मार्ट नेक सेंसर लगाए गए हैं, जो 24 घंटे पशुओं के स्वास्थ्य, जुगाली, भोजन, गतिविधि, हीट साइकिल और गर्भधारण जैसी जानकारियों की निगरानी करते हैं। किसी भी असामान्यता पर मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत अलर्ट मिल जाता है, जिससे समय पर उपचार संभव हो रहा है। एआइ तकनीक के उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, उपचार पर होने वाला खर्च घटा है और दूध उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के कारण समूह को हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की अतिरिक्त बचत हो रही है।वर्तमान में मधुबन गोशाला से प्रतिदिन करीब 45 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। हर माह लगभग 1,350 लीटर दूध की बिक्री से औसतन 45 हजार का कारोबार हो रहा है। सभी खर्चों और ऋण की किश्तों के भुगतान के बाद समूह को लगभग 10,250 रुपये प्रतिमाह शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। बैंक ऋण चुकता होने के बाद यह लाभ बढ़कर करीब 23,750 रुपये प्रतिमाह होने का अनुमान है।
समूह ने तीन बीघा भूमि लीज पर लेकर हरे चारे का उत्पादन भी शुरू किया है, जिससे पशुओं के पोषण की गुणवत्ता बढ़ी है और लागत में कमी आई है। भविष्य में समूह पनीर, घी और दही जैसे मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों के निर्माण के साथ बड़े बाजारों से जुड़ने की तैयारी कर रहा है।
मधुबन गोशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि महिलाओं का सशक्तिकरण है। जो महिलाएं पहले पारंपरिक तरीके से पशुपालन करती थीं, वे आज एआइ आधारित मोबाइल एप के जरिए पशुओं का डिजिटल स्वास्थ्य विश्लेषण कर वैज्ञानिक ढंग से डेयरी संचालन कर रही हैं। इससे उनकी तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।मधुबन गोशाला की यह सफलता साबित करती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक, संस्थागत सहयोग और ग्रामोत्थान (REAP) जैसी योजनाओं का साथ मिलता है, तो एक छोटा-सा डेयरी उद्यम भी पूरे गांव की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।

locnirnay@gmail.com

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