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गुरु दक्षिणा में सौंपा भविष्य का खाका, ‘ज्ञान योद्धाओं’ ने पंत विवि को दिया विश्वस्तरीय विजन

सब हेडिंग

ब्रेन 3.0 कार्यशाला में करीब 100 विशेषज्ञों का मंथन, रिसर्च, नवाचार, उद्योग साझेदारी, डेटा सेंटर, डिजिटल कैंपस और कृषि उद्यमिता का तैयार हुआ रोडमैप

पंतनगर।( लोक निर्णय)कभी जिन कक्षाओं में बैठकर सपनों को उड़ान दी, वर्षों बाद वहीं लौटे पंत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र इस बार विद्यार्थी नहीं, बल्कि “ज्ञान योद्धा” बनकर आए। दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक्स, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग) में देश-विदेश से पहुंचे करीब 100 विशेषज्ञों और एलुमनाई ने अपने अनुभव, ज्ञान और दूरदर्शी सोच को विश्वविद्यालय की “गुरु दक्षिणा” के रूप में समर्पित किया। परिणामस्वरूप पंत विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने का एक व्यापक विजन और भविष्य का रोडमैप सामने आया।
कार्यशाला केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि विश्वविद्यालय के अगले दशक की दिशा तय करने वाला मंच बन गई। विशेषज्ञों ने अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों से साझेदारी और कृषि तकनीकों के व्यावसायीकरण पर ठोस सुझाव दिए। आधुनिक डेटा सेंटर, हाई-स्पीड वाई-फाई नेटवर्क, सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं, एआई लैब, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सिस्टम और इनोवेशन सेल जैसे प्रस्तावों को विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
26 व 270 जून को हुए मंथन में कृषि के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर, सेंसर आधारित सिंचाई, हाइड्रोपोनिक्स, कार्बन फार्मिंग, कार्बन क्रेडिट, मौसम आधारित निर्णय प्रणाली, मृदा परीक्षण और फसल रोगों के पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की कृषि तकनीक आधारित होगी और पंत विश्वविद्यालय इस परिवर्तन का नेतृत्व कर सकता है।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि विश्वविद्यालय का अनुसंधान सीधे उद्योगों और किसानों की जरूरतों से जुड़ना चाहिए। इफको, एग्री मॉल और अन्य औद्योगिक संस्थानों के सहयोग से नवाचार केंद्र विकसित किए जाएं, कृषि तकनीकों का व्यवसायीकरण हो और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए। मक्का साइलेज, नेपियर घास, ऊर्जा फसलें तथा कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी शोध बढ़ाने की सिफारिश की गई।
विशेषज्ञों का मानना था कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना होना चाहिए जो नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। इसके लिए स्टार्टअप, उद्यमिता, मेंटरशिप, इंटर्नशिप और एलुमनाई नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता तथा असम कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एएन मुखोपाध्याय ने कहा कि एलुमनाई का यह सहयोग विश्वविद्यालय के विकास को नई गति देगा। वहीं पंत विवि के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि ब्रेन 3.0 केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के भविष्य की दिशा तय करने वाला अभियान है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां मिले सुझाव आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की नीतियों, अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों का आधार बनेंगे।
ब्रेन 3.0 ने यह संदेश भी दिया कि जब पूर्व छात्र, वैज्ञानिक, शिक्षक और विद्यार्थी एक मंच पर आते हैं तो केवल योजनाएं नहीं बनतीं, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव रखी जाती है। पंत विश्वविद्यालय के लिए यह आयोजन एक नए युग की शुरुआत और विश्वस्तरीय पहचान की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।

प्वाइंटर

ब्रेन कार्यशाला से निकले प्रमुख संदेश

विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय रैंकिंग दिलाने का लक्ष्य

डेटा सेंटर, हाई-स्पीड वाई-फाई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना

सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं का विस्तार।
उद्योग, अनुसंधान और कृषि को एक मंच पर लाना

छात्रों को जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनाना

कृषि उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना

एआई आधारित कृषि तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने वाले नवाचारों पर विशेष फोकस

एलुमनाई नेटवर्क के माध्यम से मेंटरशिप, इंटर्नशिप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मजबूत करना


locnirnay@gmail.com

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