स्वरोजगार से स्वावलंबन की मिसाल बने दयाकिशन जोशी
चंपावत।(लोक निर्णय) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में संचालित जन कल्याणकारी योजनाएं उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के जीवन में खुशहाली और सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही हैं। प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जनपद चम्पावत के दूरस्थ क्षेत्रों के युवा स्वावलंबन की नई इबारत लिख रहे हैं। इसी क्रम में जनपद के दयाकिशन जोशी एक सफल उद्यमी के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री के ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के विजन से प्रेरणा लेकर स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया है।दयाकिशन जोशी ने मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारते हुए ‘श्रीराम मसाला उद्योग’ की नींव रखी। अपने इस सपने को साकार करने के लिए उन्हें ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से पांच लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिसने उनके उद्यम के लिए महत्वपूर्ण संबल का कार्य किया। सरकारी योजनाओं के प्रभावी सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर दयाकिशन ने न केवल सफलतापूर्वक अपना मसाला उद्योग संचालित किया, बल्कि आज वह एक स्वावलंबी उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुके हैं। अपनी लगन का ही परिणाम है कि उन्होंने बैंक से लिया गया अपना पूरा ऋण समय से चुका दिया है और वर्तमान में वह प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार युवाओं को नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। दयाकिशन जोशी की यह सफलता की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आजीविका सुधारना चाहते हैं। सीमांत जनपद चम्पावत में दयाकिशन जैसे उद्यमी आज यह सिद्ध कर रहे हैं कि यदि सही सरकारी सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक सुदृढ़ीकरण संभव है। प्रदेश सरकार की इन योजनाओं ने न केवल दयाकिशन के परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य लोगों के बीच भी आत्मनिर्भरता का नया विश्वास जगाया है।




