यूजीसी के नियमों का हो लोकतांत्रिक विरोध
काशीपुर।काशीपुर के जागरूक नागरिकों ने केंद्र सरकार के
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया निर्णयों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुएइनका सामूहिक एवं लोकतांत्रिक विरोध आवश्यक बताया है।नागरिकों का कहना है कि यूजीसी के कुछ नए नियम और प्रावधानसमाज में अनावश्यक भ्रम, वैमनस्य और वर्गीय तनाव को जन्म दे रहे हैं।विशेष रूप से सवर्ण एवं पिछड़ा वर्ग के बीचबढ़ते विवाद से शैक्षणिक एवं सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है,जो किसी भी रूप में राष्ट्रहित में नहीं है।उद्योगपति व समाजसेवी राजीव घई ने बताया कि काशीपुर के नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह अनुरोध किया है किउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के माध्यम से उन्हें इस गंभीर विषय से अवगत कराया जाए कि कुछ चुनिंदा केंद्रों में ऐसी नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हैं,जो प्रधानमंत्री की जनकल्याणकारी नीतियों को बदनाम करने, उनकी लोकप्रियता पर आघात करने तथा समाज को आपस में लड़ाकर देश में विवाद और अस्थिरता का वातावरण उत्पन्न करना चाहती हैं।नागरिकों का स्पष्ट मत है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए भाईचारा, सामाजिक समरसता और समान अवसर सबसे आवश्यक हैं।किसी भी नीति या नियम के माध्यम से यदि समाज को बांटने का आभास होता है तो उस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
काशीपुर के जागरूक नागरिकों ने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया है कि यूजीसी के विवादित नए नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।जिससे सवर्ण एवं पिछड़ा वर्ग के बीच अनावश्यक टकराव समाप्त हो सके। साथ ही, सभी नागरिकों के लिए समान एवं स्पष्ट नियम बनाए जाएं, जिससे कोई भी वर्ग या व्यक्ति दूसरे के विरुद्ध झूठे या दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने का प्रयास न कर सके।





