परवल के दाम धड़ाम, मेहनत पर फिरा पानी,किसान परेशान
गाजीपुर,उत्तर प्रदेश।(लोक निर्णय) बढ़ते मौसम की मार और बाजार में गिरते दामों ने परवल उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। इस बार अच्छी पैदावार के बाद भी किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में परवल के दाम इतने नीचे गिर गए हैं कि फसल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।गंगा नदी के किनारे यानी तलहटी में परवल की बहुत अच्छी खेती होती है और नदी के किनारे फसल हरियाली के तौर पर शोभा बढ़ा रही है।किसान से 16 से 20 रुपए प्रति किलो खरीद रहे है, लेकिन बाजार में 60 से 80 रुपए में बिक रही है।गाजीपुर के मुहम्मदाबाद, जमानिया रामपुर, साधोपुर, हरिहरपुर, रेवतीपुर, नगदिलपुर, शेरपुर, सेमरा, नारायणपुर सहित कई गांवों में परवल की खेती होती है और इस समय इसकी फसल भी लगी है।तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने सब्जी भंडारण बनवाने का वादा किया था, लेकिन यह सिर्फ चुनावी वादा ही बन कर रह गया। ढूंनमुन चौधरी, सुभाष राम, अशोक दुबे, विनीत राय, जय प्रकाश राय, विनोद राय आदि किसानों से लोक निर्णय न्यूज के विशेष संवाददाता हरेंद्र नाथ राय ने बात की तो उन्होंने अपनी बात बेबाक रखीं।किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च आता है, लेकिन जब फसल मंडियों में बेचने ले जाते हैं तो व्यापारी 16 से 20 रुपए प्रति किलो परवल सब्जी खरीदते हैं।यहीं सब्जी बाजार में 60 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रही है।उनका आरोप है कि बिचौलिए की वजह से सब्जी का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है।ऐसे में मजबूरी में किसानों को औने-पौने दाम पर परवल बेचना पड़ रहा है।
किसान बताते हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही तो अगली बार परवल की खेती से किसान दूरी बना सकते हैं। किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और उचित बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करते हैं।जिससे उन्हें उनकी मेहनत का सही हक मिल सके।



