ऊधम सिंह नगर

दलित युवक केतन की हत्या पर भड़के श्रमिक संगठन

रुद्रपुर। (लोक निर्णय) टिहरी के दलित युवक केतन लाल के जघन्य हत्या के विरोध में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर के बैनर तले क्षेत्र के विभिन्न संगठनों, दलों और यूनियनों ने आज जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल और मुख्य मंत्री को ज्ञापन भेज गया। उन्होंने हत्यारों को शीघ्र सजा दिलाने, घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच और प्रदेश में जातिगत और सांप्रदायिक हिंसा पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाने आदि की मांग की।वक्ताओं ने कहा कि झूठे जातीय दम्भ के करण उत्तराखंड में जातीय उत्पीड़न काफी बढ़ता जा रहा है। बीते 7 जून को यशवीर सिंह पंवार और उसके परिजनों द्वारा ‘आनर किलिंग’ के तहत टिहरी के देवल गांव के 18 वर्षीय एक दलित युवक केतन लाल धोखे से बुलाकर उसकी निर्ममता से हत्या कर दी गई और उसके दोस्त दिवाकर डिमरी को बेरहमी से घायल कर दिया गया। केतन का अपराध सिर्फ यह था कि पड़ोसी लम्ब गांव की सवर्ण जाति की युवती उसके साथ पढ़ती थी और उसकी दोस्त थी। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे थे।वक्ताओं ने कहा कि कोई वास्तविक प्रभावी कदम न उठाने से जातीय दंभ के कारण अपमान और हत्याओं का सिलसिला जारी है। एनसीआरबी के आँकड़ों के 2024 में पूरे भारत में एससी के खिलाफ 55,698 अपराध दर्ज हुए थे। उत्तराखंड में 2023 में 123 और 2024 में 114 जातीय हिंसा की घटनाएं दर्ज हैं। ये महज दर्ज रिपोर्ट के आंकड़े हैं, कई मामले दर्ज ही नहीं होते हैं। 12 जून को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र चंपावत में एक युवक टैक्सी चालक को जूते की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, साल 2022 में अल्मोड़ा के दलित युवक जगदीश की प्रेम विवाह के कारण सवर्ण ससुराल वालों द्वारा निर्मम हत्या, पौड़ी जिले के सतपुली में पुलिस की प्रताड़ना ने एक दलित युवक पंकज द्वारा आत्महत्या, टिहरी में शादी में साथ बैठकर खाने पर दलित युवक की हत्या, दलित भोजनमाताओं के हाथ का खाना न खाना जैसी अनंत घटनाएं आए दिन घटित हो रही हैं। ये घटनाएं आज के आधुनिक और वैज्ञानिक समाज में गहरा धब्बा है।वक्ताओं ने कहा कि आज जातीय नफरत हमारे समाज में बहुत गहराई तक मौजूद है। भेदभाव, छुआछूत, जातिगत अपमान, अत्याचार, हिंसा बेलगाम है। देवभूमि उत्तराखंड सांप्रदायिक, जातिगत और महिला हिंसा का केंद्र बन गया है, नफ़रत की राजनीति जिसे लगातार हवा दे रही है। वैमानस्यता के आधार पर वर्ग विशेष को बचाना और दलित, अल्पसंख्यक वर्ग का हिंसक उत्पीड़न बेहद क्षोभपूर्ण है। यह भारत के संविधान की घोर अवमानना है। केतन लाल की जघन्य हत्यारों और दिवाकर डिमरी के आक्रान्ताओं को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा शीघ्र सजा दिलाई जाए; पूरी घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो; पीड़ित परिवार को सुरक्षा, परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और घायल युवक के उपचार का पूरा खर्च सरकार उठाए; प्रदेश में जातिगत और सांप्रदायिक हिंसा पर रोक के लिए ठोस व प्रभावी कदम उठाया जाए; संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का अनुपालन कर हर नागरिक के समानता और गरिमा पूर्वक जीने के मौलिक अधिकार की गारंटी सुनिश्चित की जाए!ज्ञापन देने वालों में दिनेश तिवारी, मुकुल, दिनेश भट्ट, हरीश मौर्य, अमर सिंह, ललित मटियाली, गोपाल सिंह गौतम, शिवदेव सिंह, गोविंद सिंह, सुधीर कुमार, विजय कुमार आर्य, महेश पाल, धीरज जोशी, मनोज कुमार, आर्को विश्नोई आदि शामिल थे।

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