तराई की बसाहट का साक्षी है तराई भवन,देश के पहले कृषि विवि की विरासत
पंतनगर। (लोक निर्णय) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का तराई भवन सिर्फ कुलपति आवास नहीं, बल्कि तराई क्षेत्र के विकास, बसाहट और देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय के निर्माण का मूक गवाह है।जहां तराई बसी,वहीं से पंतनगर की पहचान बनी।यह भवन जंगल से विवि बनने तक का सफर देखा है।यह भवन विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले का माना जाता है और इसका इतिहास तत्कालीन तराई स्टेट फार्म से जुड़ा हुआ है। जो तराई के इतिहास का जीवंत दस्तावेज भी है। करीब साढ़े 12 एकड़ में फैले यह भवन परिसर पूरी तरह हरित क्षेत्र है, विभिन्न फलों के बाग के साथ फूल,किचन आदि वाटिका की खूबसूरती व खुशबू से महक रहा है,जो हर किसी को आकर्षित करता है।आज जिस पंतनगर को देश की कृषि शिक्षा और शोध की राजधानी माना जाता है, वहां कभी घने जंगल, दलदली जमीन और विरल आबादी हुआ करती थी। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर तराई विकास योजना शुरू की थी और उसी दौरान तराई स्टेट फार्म की स्थापना की गई।इस तराई भवन का प्रशासनिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया गया।स्थानीय इतिहास और बुजुर्ग लोगों की बात मानें तो तराई क्षेत्र की बसाहट और विकास में कई अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिनमें एचएस संधू का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने यहां रहकर तराई में बसाहट और कृषि विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाया। तराई के संस्थापक और तत्कालीन पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने संधू को तराई को आबाद करने के लिए बुलाया था। 17 नवंबर,1960 को देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद भी इस भवन का महत्व बना रहा। विश्वविद्यालय के शुरुआती निर्माण काल में यहां वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी ठहरते थे। बाद में इसे कुलपति आवास के रूप में विकसित कर दिया गया। तराई भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल परिसर है। हरियाली और खुले क्षेत्र से घिरा यह परिसर देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालयी आवासीय परिसरों में से एक गिना जाता है।आज भी तराई भवन पंतनगर के गौरवशाली अतीत और आधुनिक कृषि शिक्षा के बीच एक मजबूत कड़ी बना हुआ है।हरित क्षेत्र के साथ गुलाब के फूल सहित वाटिकाओं से हवाओं में तैरती खुशबू से तराई भवन हमेशा चर्चा में रहता है। करीब 76 बसंत देख चुके रुद्रपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष छाबड़ा बताते हैं कि मेजर एचएस संधू की तराई को बसाने में अहम भूमिका रही।संधू ने ही चंडीगढ़ शहर के नक्शे के आधार पर रुद्रपुर का नक्शा तैयार कराया था।मगर बाद में राजनीतिक दखल और अतिक्रमण से रुद्रपुर का विकास सुनियोजित तरीके से यानी चंडीगढ़ के नक्शे के हिसाब से नहीं हो सका।




