कोटद्वार निगम से बिजनौर स्थित एक गोशाला में भेजे गए बेसरा मवेशी मिले कम!
कोटद्वार : नगर निगम की ओर से अगस्त में सड़कों से उठाए गए 332 बेसहारा मवेशियों को उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित एक गोशाला में भेजने के दावे पर सवाल उठने लगे हैं। पीपल फॉर एनिमल्स उत्तराखंड की निदेशक नीति सुधार एवं भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की मानद प्रतिनिधि रुबीना नितिन अय्यर ने स्वयं बिजनौर स्थित उक्त गोशाला का स्थलीय निरीक्षण किया तो हैरानी वाला मामला सामने आया। गोशाला संचालक ने लिखित रूप से पुष्टि की है कि कोटद्वार नगर निगम से केवल 10 बेसहारा मवेशी ही गोशाला पहुंचाए गए हैं।कोटद्वार नगर निगम द्वारा जारी आरटीआइ में यह स्वीकार किया गया है कि मवेशियों को उत्तराखंड से बाहर भेजने के लिए जिलाधिकारी से अनुमन्य स्वीकृति (सेक्शन 6, उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007) नहीं ली गई ।परिवहन से पूर्व किसी भी मवेशी का फिटनेस सर्टिफिकेट किसी पशु चिकित्सक द्वारा जारी नहीं किया गया।रुबीना नितिन अय्यर ने बताया कि चौंकाने वाली बात यह है कि जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल की ओर से भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह मुद्दा प्रशासन के लिए कोई गंभीर प्रश्न ही न हो। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि बड़ी मात्रा में मवेशियों की संभावित तस्करी और अवैध वध का संकेत भी देता है। क्या इन्हें अवैध रूप से वधशालाओं में भेजा गया? खासतौर पर जब बिजनौर क्षेत्र गो_वध के लिए कुख्यात माना जाता है तो संदेह और भीगहरा हो जाता है।





