उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम की धारा 6(1) पहली बार लागू
देहरादून : पशु संरक्षण और कानून प्रवर्तन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाल ही में उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007 की धारा 6(1) को पहली बार किसी वास्तविक मामले में लागू किया गया। इस कानून के तहत किसी भी गाय या उसके बछड़े को उत्तराखंड राज्य से बाहर ले जाने से पहले जिलाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है। इसका उल्लंघन संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद, सीमा पार अवैध पशु परिवहन एक आम और लंबे समय से अनदेखी की गई समस्या बनी हुई है।हाल ही में खुशालपुर से सहारनपुर ले जाई जा रही दो गायों और एक बछड़े को बिना अनुमति ले जाते हुए धर्मावल चौकी पुलिस ने एक वाहन जब्त किया। यह कार्रवाई पीपल फॉर एनिमल्स, उत्तराखंड की रूबीना नितिन अय्यर और सुरभि त्रिपाठी द्वारा दी गई लिखित शिकायत के बाद की गई, जिसके पश्चात पशुओं को सुरक्षित रूप से गोशाला में स्थानांतरित किया गया।नीति सुधार, पीपल फॉर एनिमल उत्तराखंड की निदेशक रुबीना नितिन अय्यर ने बताया कि केवल कानून होने से पशुओं की रक्षा नहीं होती,उनका प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। अधिनियम और नियम पहले से मौजूद हैं। अब नीति लागू करने वाली एजेंसियों को इन्हें गंभीरता, जिम्मेदारी और निरंतरता के साथ लागू करना होगा। बताया कियह कार्रवाई उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है और यह स्पष्ट संदेश देती है कि गोवंश संरक्षण कानूनों के उल्लंघन को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। पशु कल्याण कानूनों को उनके वास्तविक उद्देश्य तक पहुंचाने के लिए सतत निगरानी और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है।
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