वर्ष 2025 में केवल 21 प्रतिशत पाॅस्को तथा 31 प्रतिशत गंभीर अपराध के मुकदमों में सजा
काशीपुर। (लोक निर्णय)वर्ष 2025 में ऊधम सिंह नगर के न्यायालयों ने कुल 9165 अपराधिक मुकदमोें का फैसला किया है। भारतीय दंड संहिता के गंभीर अपराधों (सत्र न्यायालय) वाले मुकदमोें में 31 प्रतिशत 40 मुकदमों में सजा हुई है,जबकि 91 मुकदमोें में रिहाई हुई हैै। बालक/बालिकाओं के यौन उत्पीड़न के विशेष कानून पाॅस्को के 21 प्रतिशत 27 मुकदमों में सजा हुई तथा 99 मुकदमों में रिहाई हुई। यह खुलासा सूचना का अधिकार में हुआ है।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने अभियोजन निदेशालय से वर्ष 2025 में मुकदमों में सजा व रिहाई सम्बन्धी विवरणों की सूचना मांगी थी।निदेशालयकी ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2025 में भारतीय दंड संहिता के सत्र न्यायालय में विचारण योग्य गंभीर मुकदमोें (हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार आदि) के 150 मुकदमें निर्मित हुए। जिसमें 40 मुकदमों में सजा हुई है। जबकि 91 मुकदमों में रिहाई हुई हैै अर्थात अभियोजन व पुलिस अपराध के साबित करनेे में सफल नहीं हुए हैैं। इस अवधि में 19 ऐसे मुकदमें क्वैश/दाखिल दफ्तर भी हुये हैै। सजा का प्रतिशत 31 प्रतिशत है।
अन्य अधिनियमोें के अन्तर्गत सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय गंभीर मुकदमोें में सजा का प्रतिशत 75 है। 2025 में ऐसे 542 मुकदमें निर्णीत हुए है।जिसमें 351 मुकदमोें में सजा हुई हैै तथा 114 मुकदमोें में अपराध साबित नहीं हुए है व रिहाई हुई है। ऐसे 45 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुए हैै।
श्री नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2025 में अधीनस्थ न्यायालयोें (मजिस्ट्रेटोें आदि के न्यायालयोें) में भारतीय दंड संहिता केे अपराधों केे 341 मामलों में सजा हुई है जबकि 126 मामलोें में रिहाई हुई है। इस अवधि में 537 मुकदमों में राजीनामा हुआ है तथा 304 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुए हैै। सजा का प्रतिशत 73 प्रतिशत है।
अन्य अधिनियम के अन्तर्गत अधीनस्थ न्यायालयोें द्वारा विचारणीय मुकदमोें में 2064 मामलों में सजा हुई है। जबकि 83 मामलोें में रिहाई हुई हैैं। 1168 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुये हैै। सजा का प्रतिशत 96 प्रतिशत है। सजा वाले मामलों में मोटर वाहन अधिनियम सहित अन्य अधिनियम के चालान व जुर्माने के मामले भी शामिल होते हैं।नदीं कोे उपलब्ध विवरण केे अनुसार 2025 के प्रारंभ में जिला ऊधम सिंह नगर के सत्र न्यायालयों में 3465 मुकदमें लम्बित थे। जोे वर्ष के अन्त में बढ़कर 3794 हो गये जबकि इस अवधि में 1021 न्यू मामले दायर हुए हैं।2025 केे प्रारंभ में जिले के अधीनस्थ न्यायालयों में अपराधों के कुल 30716 मुकदमें लम्बित थे जो वर्ष के अंत में घट़कर 27246 रह गये जबकि इस अवधि में 1311 नये मुकदमें दायर हुए हैं।
श्री नदीम को उपलब्ध विवरण के अनुसार जिले की विशेष न्यायालय पाॅस्का ने 141 मुकदमें निर्णीत किये जिसमें केवल 21 प्रतिशत 27 मुकदमों में सजा हुई तथा 99 मुकदमों में रिहाई हुई, 15 मुकदमें क्वैश/दाखिल दफ्तर हुये। वर्ष के प्रारंभ में 645 मुकदमें लंबित थे 188 नये मुकदमें दायर हुये तथा अंत में 692 मुकदमें लम्बित रहे।
विशेष एससी/एसटी न्यायालय में वर्ष 2025 में निर्णीत 14 मुकदमों में 50 प्रतिशत 2 में सजा तथा 2 में रिहाई हुई 10 मुकदमें दाखिल दफ्तर/क्वैश हुए। वर्ष के प्रारंभ में 90 केस लम्बित थे, 11 नये दायर हुये तथा वर्ष के अंत में घटकर 87 केस लम्बित रह गए।विशेष न्यायालय गैगेस्टर में वर्ष 2025 में निर्णीत 5 मुकदमों में से 25 प्रतिशत 1 में सजा तथा 3 में रिहाई हुई तथा 1 केस दाखिल दफ्तर/क्वैश हुआ। वर्ष के प्रारंभ में 180 केस लम्बित थे, 4 न्यू दायर हुये। वर्ष के अंत में घटकर 179 केस लंबित रह गए।विशेष न्यायालय एफटीएससी के निर्णीत 40 मुकदमों में से 13 प्रतिशत दो में सजा तथा 13 में रिहाई हुई तथा 4 केस दाखिल दफ्तर हुये। वर्ष के प्रारंभ में 114 केस लंबित थे, 42 नये केस दायर हुये। अंत में बढ़कर 116 हो गए।विशेष न्यायालय एनडीपीएस(नशीले पदार्थ सम्बन्धी अपराध) के 117 केस निर्णीत हुए।जिसमें 84 प्रतिशत 73 मामलों में सजा हुई तथा 14 मामलों में रिहाई, 30 मामले दाखिल दफ्तर हुये। वर्ष के प्रारंभ में 1117 केस लंबित थे 213 नये केस दायर हुये। अंत में बढ़कर 1213 हो गए।





