जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ किया गया व्यवहार ठीक नहीं:सुशील
हल्द्वानी। उत्तराखंड क्रांति दल के केन्द्रीय महामंत्री सुशील उनियाल ने कहा कि प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया व्यवहार केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र और सत्ता के अहंकार का घिनौना प्रदर्शन प्रतीत होता है।सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्माचार्य के साथ इस प्रकार की अभद्रता यह साबित करती है कि वर्तमान शासन-प्रशासन संत समाज और धार्मिक परंपराओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो चुका है। सुशील उनियाल ने कहा कि यह घटना कोई साधारण प्रशासनिक भूल नहीं है। देश आज भी नहीं भूला है कि दिल्ली में योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ आधी रात को किस प्रकार बल प्रयोग किया गया था। प्रयागराज की यह घटना उसी मानसिकता की पुनरावृत्ति प्रतीत होती है। यह आशंका पूरी तरह जायज़ है कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी के साथ भी वैसा ही व्यवहार करने की पूर्व नियोजित योजना थी। जिसे समय रहते रोका न जाता तो स्थिति और भयावह हो सकती थी।यह अत्यंत चिंताजनक है कि जिन संत-महात्माओं ने इस देश की आत्मा, संस्कृति और राष्ट्रभाव को जीवित रखा, आज उन्हीं को सत्ता के इशारे पर अपमानित किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन का यह रवैया दर्शाता है कि वह कानून के रक्षक की बजाय सत्ता के आदेशपाल बनकर काम कर रहा है।उत्तराखंड क्रांति दल स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देना चाहता हैं कि संत समाज के धैर्य को कमजोरी न समझा जाए। यदि इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच, दोषी अधिकारियों पर तत्काल निलंबन, और राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई तो यह आंदोलन केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में जनआंदोलन का रूप लेगा।





