उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर स्वास्थ्य

हाईकोर्ट ने पॉलीथीन प्रदूषण पर चिंतित, सरकार से कहा धर्मस्थल और ग्लेशियरों को कचरे से मुक्त करें

हल्द्वानी।(लोक निर्णय) पूर्व जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉक्टर आशुतोष पंत ने बताया कि उनके द्वारा दायर जनहित याचिका WPPIL संख्या 82/2026 पर कल 24 जुलाई को उच्च न्यायालय नैनीताल में सुनवाई हुई। उनके अधिवक्ता पूरन सिंह रावत और अभिषेक रावत ने पक्ष रखा। मैं न्यायमूर्ति मनोज तिवारी और पंकज पुरोहित का हृदय से आभारी हूं कि उन्होंने स्वयं मुझे भी अपनी बात रखने का मौका दिया। बताया कि उन्होंने न्यायालय से प्रार्थना की है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निर्माण और प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। जब तक निर्माण बंद नहीं होगा। तब तक बाजार में पॉलीथीन आती रहेगी। अगर हमें प्लास्टिक कचरा रोकना है तो स्रोत को बंद करना होगा।
आज स्थिति यह है कि हर गांव, शहर, कस्बों में जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। जरा सी बारिश होती है तो सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, लोगों के घरों में पानी भर जाता है। आज से 25/30 साल पहले जब पॉलीथीन प्रचलन में नहीं थी। तब ऐसी गम्भीर स्थिति कभी नहीं रही। अतिवृष्टि होने पर नदियों में बाढ़ जरूर आती थी, तटीय इलाके प्रभावित होते थे पर हर जगह जल भराव जैसे आज के समय होता है तब नहीं होता था।
अफसोस की बात यह है कि आज माइक्रोप्लास्टिक भूजल में पहुंच गया है, समुद्र की सबसे गहरी जगह में पाया गया है। यहां तक कि ग्लेशियरों में भी पहुंच गया है। स्तनपान कराने वाली माओं के दूध तक में माइक्रोप्लास्टिक का मिलना बहुत ही दुर्भायपूर्ण स्थिति है। कैंसर के मामलों में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा कारण माइक्रोप्लाटिक भी है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भारत में हर पांचवे आदमी के रक्त में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच चुकी है। यदि अब भी अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में कोई भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा।अफसोस यह है कि लोग पढ़े लिखे होकर भी नादानी करते हैं इधर उधर पॉलीथीन में रखकर कूड़ा फेंक देते हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे पर्वतीय धाम, बुग्याल भी प्लास्टिक और कूड़े से पटे पड़े हैं वहां के वीडियो देखकर मन विचलित हो जाता है।
लोग सड़कों के किनारे भंडारा करते हैं, शरबत पिलाते हैं और कूड़ा सड़कों पर फैला रह जाता है।न्यायालय ने अपने आदेश में मुझे एक सप्ताह में मुख्य सचिव को इस संबंध में सुझाव देने को कहा है। अगली तारीख सितंबर में लगी है।शासन प्रशासन को कूड़ा फैलाने वालों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए़ पर ये हालात केवल नियम बनाकर ही सुधरने वाले नहीं है। लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा और दूसरों को भी जगाना होगा।

locnirnay@gmail.com

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