चरित्रवान युवा ही सशक्त राष्ट्र की नींव’, पंत विवि में शिक्षकों को मिला राष्ट्र निर्माण का मंत्र
पंतनगर। (लोक निर्णय) शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखंड प्रांत एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर आज दो दिवसीय प्रांतीय कार्यशाला में शिक्षा की गुणवत्ता, राष्ट्र निर्माण आदि पर मंथन किया गया।कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री एवं गन्ना विकास सलाहकार समिति के सदस्य श्यामवीर सैनी, विशिष्ट अतिथि प्रो. नवीन चंद्र लोहनी तथा अध्यक्षता पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने की। अतिथियों का स्वागत शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संरक्षक एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने किया, जबकि कार्यशाला की प्रस्तावना प्रांत संयोजक प्रो. कमल देवलाल ने प्रस्तुत की।मुख्य अतिथि श्यामवीर सैनी ने किसानों के योगदान और देश की खाद्य सुरक्षा में कृषि की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने शिक्षा में शिक्षक की भूमिका, चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास तथा दूरस्थ शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता पर विचार रखे।
कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने “युवा शिक्षा और कल्याण से देशहित” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय गुरुकुल परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करना था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने इसी भारतीय शिक्षा दर्शन को नए स्वरूप में अपनाया है, जिससे देश को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।कार्यशाला में डॉ. शिवओम राठौर, डॉ. अशोक मंडोला, पर्यावरणविद डॉ. विनोद प्रसाद जुगलान, डॉ. ब्रजलता चौहान, डॉ. पंकज सिंह, प्रो. गिरीश चंद्र जोशी, प्रो. ए.के. प्रतिहार, डॉ. दीपशिखा, डॉ. सुरेंद्र पडियार, प्रो. विश्वनाथ, श्री तुलसी प्रसाद भट्ट, प्रो. संजय कुमार, प्रो. बृजेश सिंह, डॉ. जितेंद्र क्वात्रा, प्रो. आशुतोष सिंह, डॉ. कमल प्रकाश सक्सेना, प्रो. अरविंद भट्ट, प्रो. आशुतोष भट्ट और डॉ. गीता पाठक सहित कई शिक्षाविदों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
दूसरे दिन समीक्षा, मूल्यांकन, सतत सुधार, नेतृत्व और शिक्षण पद्धति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। समापन सत्र में मुख्य अतिथि डाल चंद, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, ने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आर.एस. जादौन, अधिष्ठाता, पंतनगर विश्वविद्यालय ने की। इस अवसर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सहसंयोजक डॉ. वीरेंद्र तिवारी आदि मौजूद थे।





