पंत विवि के 1384 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
पंतनगर।(लोक निर्णय) गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के 37वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने विद्यार्थियों को मेडल और उपाधि प्रदान की।उन्होंने कहा कि अपने परिश्रम और समर्पण से यह सफलता अर्जित करने वाले सभी विद्यार्थियों को हृदय से हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर केवल डिग्रियों के वितरण का नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के कृषि इतिहास, उसके संघर्ष, उसकी उपलब्धियों और उसके उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब हम अतीत की चुनौतियों से सीख लेते हुए वर्तमान की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं और एक सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु नए संकल्पों का निर्माण करते हैं। वास्तव में, किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके गुरुजनों और परिवार का अमूल्य योगदान होता है।राज्यपाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न को ‘ब्रह्म’ कहा गया है। शास्त्रों में उल्लेख है- “अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्” अर्थात् अन्न का अधिकाधिक उत्पादन करना ही हमारा सर्वोच्च व्रत होना चाहिए। यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का मूल मंत्र है। अन्न केवल मानव जीवन का आधार नहीं है, बल्कि समस्त जीव-जगत के अस्तित्व की आधारशिला है। अन्न की समृद्धि ही किसी भी समाज को स्थिर, समृद्ध और सशक्त बनाती है। अतः कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानवता के संरक्षण और सभ्यता के निरंतर विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि आज आप सभी अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति और विशेष रूप से कृषि एवं ग्रामीण भारत के समग्र विकास के प्रति जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन है। हम सभी जानते हैं कि जब भारत ने वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की, तब देश की कृषि स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। खाद्यान्न की भारी कमी, सीमित उत्पादन क्षमता और आयात पर निर्भरता ने देश को “Ship-to-Mouth Economy” की स्थिति में ला खड़ा किया था। पारंपरिक खेती, सीमित सिंचाई संसाधन, उन्नत बीजों और आधुनिक तकनीकों का अभाव – ये सभी हमारी कृषि प्रगति में बड़ी बाधाएं थे। उस समय सबसे बड़ी चुनौती थी- देश के प्रत्येक नागरिक तक भोजन सुनिश्चित करना। ऐसी विषम परिस्थितियों में पंतनगर विश्वविद्यालय की स्थापना एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय सिद्ध हुई। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने “Seed to Plate” की अवधारणा को साकार करते हुए गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और उनके व्यापक प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई है। यहाँ से शिक्षित होकर निकले विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने कहा कि आज देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में पंतनगर के पूर्व छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, यह इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता का प्रमाण है।आज की सदी तकनीक और नवाचार की सदी है। कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, प्रिसिजन फार्मिंग, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ये सभी आधुनिक कृषि के नवीन आयाम हैं। उन्होंने कहा कि अब समय की मांग है कि हम पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय करते हुए “स्मार्ट एग्रीकल्चर” की दिशा में आगे बढ़ें। इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि कृषि अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भी बनेगी। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आग्रह करते हुए कहा कि खुली आँखों से बड़े सपने देखें। ऐसे सपने देखें जो आपको चैन से बैठने न दें, जो आपको निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। छोटे लक्ष्य केवल सीमित उपलब्धियों तक ले जाते हैं, जबकि बड़े सपने व्यक्ति को असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं। आपके सपनों में केवल आपका भविष्य नहीं, बल्कि भारत का भविष्य भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। राज्यपाल नेविद्यार्थियों से कहा कि आपकी यह डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा दायित्व है, जो आपको समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी ही नहीं, बल्कि उत्तरदायी नेतृत्वकर्ता बनाता है। इसलिए एक अनुशासित, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन शैली अपनाना ही आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा करते हुए कहा कि आप केवल ‘जॉब सीकर्स’ नहीं, बल्कि ‘जॉब प्रोवाइडर्स’ बनने का संकल्प लें। कृषि आधारित स्टार्टअप्स, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से आप न केवल अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि समाज में रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं। यही सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा है।कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि आज का यह पावन अवसर हम सभी के लिए गर्व और गौरव का क्षण है।सांसद अजय भट्ट ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल किस्में विकसित की, जल संरक्षण तकनीकों पर कार्य किया।कुलपति डॉ.मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में 1384 विद्यार्थियों को को उपाधि प्रदान की गई, जिसमें 721 छात्र और 664 छात्राएं शामिल थे।।





