राष्ट्रपति ने डॉ शिवेंद्र कश्यप को गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के विद्वत परिषद में प्रमुख शिक्षाविद के रूप में किया मनोनयन
पंतनगर।गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के प्रोफेसर और पूर्व डीन डॉ. शिवेंद्र कश्यप का राष्ट्रपति महोदया ने हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्वत परिषद में प्रमुख शिक्षाविद के रूप में मनोनयन किया है। समस्त केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति विजिटर हैं और उनके द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विद्वत परिषद में देश के पांच-पांच प्रमुख शिक्षाविदों का मनोनयन किया जाता है। जो सम्बंधित विश्विद्यालय के शैक्षणिक सलाहकार के रूप में उनका मार्गदर्शन करते हैं। डॉ. शिवेंद्र कश्यप पंतनगर विश्वविद्यालय में विगत अट्ठाइस वर्षों से कार्यरत हैं और उन्होंने हेड, डीन, नाहेप परियोजना के परियोजनाधिकारी, अनेक परियोजनाओं के पीआई, भारत सरकार के टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटर कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विश्वविद्यालय का पंतनगर म्यूजियम, सामुदायिक रेडियो केन्द्र और वर्चुअल लैब उनकी ही देन है। नाहेप परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय के 65 स्नातक कक्षाओं में इंटरैक्टिव पैनल लगवा कर पूरे विश्वविद्यालय को ऑनलाइन अध्ययन के लिये तैयार करना उनकी महत्वपूर्ण देन है ।जिसके फलस्वरूप कोरोना महामारी के बीच पंतनगर विश्वविद्यालय में एक दिन भी पढ़ाई का नुकसान नहीं हुआ। डॉ शिवेन्द्र कश्यप को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने डॉ सी सुब्रमण्यम आउटस्टैंडिंग टीचर अवार्ड से सम्मानित किया वहीं भारत सरकार ने उनके प्रयासों को राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कार से चार-चार बार सम्मानित किया। डॉ कश्यप ने डीन के रूप में कृषि महाविद्यालय में योगदान-आधारित उत्कृष्ट शिक्षक एवं विद्यार्थी सम्मान कार्यक्रम की शुरुआत की जिसके आधार पर पांच वर्षों में उच्च-गुणवत्ता वाले शोध-पत्रों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गयी । सहभागिता-पूर्ण नेतृत्व का नायाब मॉडल खड़ा करते हुए उन्होंने महाविद्यालय में कोर एक्शन ग्रुप, कॉलेज डॉक्यूमेंटेशन कमेटी, कॉलेज ऐकडेमिक कमेटी, कॉलेज मेंटेनेंस कमेटी बनाई जिसमें सत्तर से अधिक शिक्षक कॉलेज की गुणवत्ता और बढ़ोतरी के कार्यक्रमों के संचालन में सक्रिय हुए । उन्होंने प्रत्येक वर्ष कॉलेज एनुअल रिपोर्ट प्रकाशित किया जिसमें सबके महत्वपूर्ण योगदानों को संकलित कर उन्हें कॉलेज के इतिहास का हिस्सा बनाया । माननीय राष्ट्रपति द्वारा उनके उत्कृष्ट शिक्षाविद के रूप में गढ़वाल विश्वविद्यालय के विद्वत परिषद में मनोनयन से निश्चय ही उनके वृहद अनुभव का लाभ गढ़वाल विश्वविद्यालय को प्राप्त होगा।




