संयुक्त श्रमिक मोर्चा का प्रदर्शन
रुद्रपुर।(लोक निर्णय)ट्रेड यूनियन ऐक्टू ने संयुक्त श्रमिक मोर्चा के साथ मिलकर आज राज्य कर्मचारी बीमा निगम( ईएसआइसी) अस्पताल के समक्ष प्रदर्शन कर ईएसआइ के राष्ट्रीय डॉयरेक्टर जनरल को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर 21 हजार वेतन की सीलिंग हटाने की मांग की। ऐक्टू प्रदेश अध्यक्ष व संयुक्त श्रमिक मोर्चा अध्यक्ष ने कहा दिनेश तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में लगातार ऐसे कानून बना रही है व संशोधित कर रही है जिससे मेहनतकश मजदूर व आमजन को नुकसान हो रहा है। साथ ही कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को खत्म करते हुए श्रमिकों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को भी न्यूनतम किया जा रहा है। ऐसे में श्रमिक भारी महंगाई के दौर में बंधुवा गुलाम की तरह जीवन यापन करने को मजबूर हैं। ऐसे में जरूरी है कि ईएसआइ अधिनियम/सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत वेतन सीमा समाप्त करने अथवा वेतन सीमा को कम-से-कम 45,000 रुपये तक बढ़ाने की जरूरत है। इसी जरूरत के तहत ऐक्टू की याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार व कर्मचारी राज्य बीमा निगम को निर्देश दिया है कि ईएसआइ संबंधी याचिकाओं पर कार्यवाही करें और 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करें।ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री कॉमरेड केके बोरा ने कहा कि “अखिल भारतीय मांग दिवस” के रूप में आज ऐक्टू देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। जिसमें ईएसआइ के तहत प्राप्त होने वाले लाभ में वेतन सीमा समाप्त करने या ईएसआइ की वेतन सीमा को बढ़ाकर 45 हजार रुपए करने की मांग उठाई जा रही है। ईएसआइ के तहत इलाज का लाभ उन श्रमिकों को मिलता था जिनका वेतन 15 हजार से कम था। वर्ष 2016 में अंतिम बार इस सीमा को बढ़ाकर 21 हजार प्रति माह किया गया था। इसके बाद पिछले दस वर्षों से यह सीमा अपरिवर्तित है। जबकि इस अवधि में जीवन-यापन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है, महंगाई लगातार बढ़ी है। 2016 के स्तर पर वेतन सीमा को बनाए रखना वर्तमान परिस्थितियों में अन्यायपूर्ण है और ईएसआई योजना के मूलभूत व सार्वभौमिकता के सिद्धांत के विपरीत है। दुर्घटना पर इलाज, अंग-भंग पर अच्छी पेंशन, मृत्यु पर परिवार को सहारा, मजदूर समेत उनके आश्रितों की बीमारी पर अच्छा इलाज हर मजदूर का हक है। मोदी सरकार को ये हक देना पड़ेगा।इंकलाबी मजदूर केंद्र के कोषाध्यक्ष दिनेश चंद्र ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच जीवन और आजीविका के अधिकार का एक पहलू है और इसे किसी कृत्रिम तथा पुराने आय मानदंड द्वारा सीमित करने के बजाय सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस दौरान भाकपा(माले) जिला सचिव ललित मटियाली, ऐक्टू जिला सचिव अनीता अन्ना, नगर अध्यक्ष प्रकाश नेगी, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन के अध्यक्ष हीरा राठौर, ऑटोलाइन श्रमिक यूनियन के जीवन लाल, शरफ़त अली, मंत्रीमेटलिक्स कर्मचारी यूनियन के हेम भट्ट, सहित शराफत अली, नंदलाल यादव, जगमोहन डसीला, गंगाराम, पूरन सिंह, उमाशंकर, रामजीत प्रसाद, नागेन्द्र यादव, राजेंद्र सिंह, कमल यादव, भाष्कर जोशी, विनोद, संजीत सहित कई श्रमिक मौजूद थे।





