ऊधम सिंह नगर

संगोष्ठी में दिखा युवा, संस्कृति और नवाचार का अद्भुत संगम

पंतनगर।भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ें और आधुनिक तकनीक की असीम संभावनाएं जब दोनों एक-दूसरे का मार्गदर्शन करें। तब युवा केवल भविष्य की आशा नहीं, बल्कि वर्तमान के सक्रिय राष्ट्रनिर्माता बनते हैं। इसी दृष्टि के साथ विवेकानन्द स्वाध्याय मण्डल द्वारा आयोजित “युवा, राष्ट्रीय युवा जागरण महोत्सव” के अंतर्गत 21वीं राष्ट्रीय युवा संगोष्ठी का आयोजन गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में किया गया। आज यह संगोष्ठी युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए तकनीक को राष्ट्रसेवा का साधन बनाने की प्रेरणा देने वाला एक सशक्त वैचारिक मंच बनी। पिछले इक्कीस वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचार, संवाद और संकल्प की एक जीवंत परंपरा है। स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में युवाओं को देश के सशक्त, आत्मनिर्भर एवं मूल्य-आधारित नागरिकों की नींव के रूप में देखने वाली उनकी चिरस्थायी दृष्टि को उजागर करता है। इस वर्ष ‘मंथन’ का आयोजन 12 जनवरी से शुरू हुआ, जिसमें देश के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विद्वानों ने सहभागिता की। आइ आइआइटी कानपुर, आइसीएआर–आइएआरआइ, आरएलबीसीएयू झांसी, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों ने शोध पत्र प्रस्तुतियों के लिए अपनी प्रविष्टियाँ भेजीं। इस वर्ष की थीम ‘सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति: प्रौद्योगिकीय नवाचारों के माध्यम से सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं का मार्गदर्शन’ में गहराई से उतरते हुए, यह आयोजन युवाओं को परंपरा और प्रौद्योगिकी के सार्थक समन्वय पर चिंतन के लिए प्रेरित करता है। स्वामी आत्मश्रद्धानंद, सचिव, रामकृष्ण मिशन आश्रम, पद्मश्री चैतराम पवार, प्रतीक शर्मा, संस्थापक, ग्रीन्स एंड ग्रेन्स, चवन मेहरा, उपाध्यक्ष (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग), इंटेल कॉर्पोरेशन, हार्दिक मेहता, अखिल भारतीय आइटी प्रमुख, विवेकानंद केंद्र, सुरेश कुमार, वैज्ञानिक एवं समूह निदेशक, आइआइआरएस-इसरो सहित अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह पांच बजे युवा रैली से हुआ। हाथों में प्रेरक संदेश और मन में राष्ट्र के प्रति दायित्व की भावना लिए युवाओं ने पूरे परिसर को ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर दिया। कड़ी सर्दियों के बावजूद प्रतिभागियों और सदस्यों की ऊर्जा इतनी संक्रामक रही कि पंतनगर की गलियाँ भी ऊष्मा, उत्साह और आपसी एकजुटता से भर उठीं।संगोष्ठी में युवा प्रतिभाओं का स्वागत करते हुए डॉ. एसके कश्यप, मेंटर, विवेकानंद स्वाध्याय मण्डल, ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पिछले 21 वर्षों से यह कार्यक्रम छात्रों द्वारा और छात्रों के लिए आयोजित किया जा रहा है-वे छात्र जो एक उज्ज्वल भविष्य के वाहक हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वामी विवेकानंद के आदर्श हमें प्रतिदिन एक आत्मनिर्भर, सशक्त और मूल्य-आधारित राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। इस सम्मेलन की विशिष्टता इसमें निहित है कि यह केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहता, बल्कि युवाओं को नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा के लिए व्यवहारिक रूप से तैयार करता है, जहां चिंतन, संवाद और संकल्प एक साथ आकार लेते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक विचार-प्रक्रिया, एक विचारधारा और एक जीवन-दर्शन हैं। कुलपति डॉ. एमएस चौहान ने कहा कि युवा जैसे ज्ञानवर्धक मंच से युवा प्रतिभाओं को राष्ट्र के विकास के लिए अपनी ऊर्जा और विचारों को विकसित करने का अवसर मिलता है। यह आवश्यक है कि हम उनकी क्षमता को बड़े उद्देश्यों की ओर निर्देशित करें।प्रेरणा तिवारी, संयोजक, विवेकानंद स्वाध्याय मण्डल ने कहा कि संवाद, चिंतन और मार्गदर्शन के माध्यम से, यह सम्मेलन युवा प्रतिभागियों के बीच स्वामित्व और नेतृत्व की भावना विकसित करता है, और इस बात की पुष्टि करता है कि जागरूक और मूल्य-आधारित युवा ही समावेशी राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने के केंद्र में हैं।राष्ट्रीय युवा सम्मेलन ‘मंथन’ की राष्ट्रीय समन्वयक रितिका सिंह एवं यश जोशी ने कहा कि “सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति ” विषय पर आधारित यह सम्मेलन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तेजी से बदलती तकनीक के साथ सामंजस्य बिठाने की आवश्यकता पर बल देता है। ऐसे समय में जब डिजिटल उपकरण दैनिक जीवन को आकार दे रहे हैं, यह मंच युवाओं को संवेदनशीलता और उद्देश्य के साथ नवाचार को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रगति सामाजिक मूल्यों को दूर करने के बजाय उन्हें और मजबूत करे। आज भारत अपनी गौरवशाली पहचान के लिए जाना जाता है, ऐसे में राष्ट्र निर्माण इस प्रकार होना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहें और आधुनिक युग की तकनीकों का भी समुचित लाभ उठाएँ।कार्यक्रम के दौरान, “सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति: तकनीकी नवाचारों के साथ सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र निर्माण हेतु युवाओं का मार्गदर्शन” शीर्षक से शोध पत्रों के एक संकलन का विमोचन किया गया। इस संकलन में इस वर्ष के सम्मेलन के चार उप-विषयों के लिए प्रभावशाली और व्यावहारिक समाधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसके साथ ही, गिरिजेश महरा, अमन कम्बोज और दीपक प्रकाश द्वारा लिखित “विवेक कथामृत” नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसमें स्वामी के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को व्यक्त किया गया है।वक्ताओं ने युवाओं की भूमिका, विचारशील नेतृत्व और राष्ट्रनिर्माण में उनकी सहभागिता पर बल दिया।पद्मश्री से सम्मानित चैतराम पवार ने कहा कि राष्ट्र का सशक्त भविष्य तभी सुनिश्चित हो सकता है, जब युवा परिश्रम, नवाचार और नैतिक मूल्यों को अपना मार्गदर्शक बनाएं। उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और समाज व राष्ट्र के हित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि सच्ची प्रगति वही है, जिसमें व्यक्तिगत उन्नति के साथ-साथ सामूहिक कल्याण को भी समान महत्व दिया जाए।श्री हार्दिक मेहता, अखिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख, विवेकानंद केंद्र, ने कहा कि तकनीक तब ही सार्थक है, जब वह सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित से जुड़ी हो, तथा युवाओं से आह्वान किया कि वे डिजिटल क्षमता का उपयोग राष्ट्रसेवा और सामाजिक उत्थान के लिए करें। चवन मेहरा, उपाध्यक्ष, सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी, इंटेल कॉर्पोरेशन, ने कहा कि डिजिटल प्रगति तभी सार्थक होती है, जब वह नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़े। सांसंगोष्ठी का द्वितीय दिवस 13 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।

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