उत्तराखंड ऊधम सिंह नगर

विवि के तीन छात्रों की आत्महत्या के मामले में प्रशासन ने क्या की कार्रवाई?

पंतनगर।देश के शायद ही किसी शिक्षण संस्थान में ऐसा हादसा हुआ होगा,जैसा उत्तराखंड के गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में कुछ माह पहले हुआ था। एक ही सेमेस्टर में उत्तराखंड के तीन प्रतिभावान छात्रों ने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली थी। इनमें बताया गया कि अंग्रेजी में कमजोर होने पर एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। सोचिए,जिन अभिभावकों के बेटे ने आत्महत्या की है,उन अभिवावकों पर क्या बीतती होगी।मगर इससे विश्वविद्यालय को कोई लेना देना नहीं है।किच्छा के बहुत ग़रीब परिवार का चिराग नीरज जो पूरी ज़िन्दगी आंधियों से लड़ता रहा और जेईई में अच्छा स्कोर लाकर पंतनगर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दाखिला पाया था। केवल अंग्रेजी न जानने के कारण अपने हॉस्टल में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली।किच्छा के ग़रीब अभिभावक रो रो कर विश्वविद्यालय को कोसते रहे कि विश्वविद्यालय ने उनके बच्चे को खा लिया। इसके बाद टेक्नोलॉजी थर्ड ईयर के अक्षत ने आत्महत्या कर ली थी।अन्तिम वर्ष का छात्र विवेक अपने छात्रावास के कमरे में फांसी से लटक गया।एक निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया।जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हैरानी है कि अभी तक इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन मौन है।लोग सवाल उठा रहे हैं कि विवि प्रशासन इस मामले में क्या जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की है?क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लिया? मृतक के परिजनों के दर्द व रोने की आवाज कुलपति और शासन तक पहुंची?यदि नहीं तो क्या प्रशासन इस मामले में संवेदनहीन है?आखिर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?,क्या जांच कराई गई?जांच रिपोर्ट में क्या मामला सामने आया?ऐसे तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं।यह भी विवि की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया जा रहा है कि एक छात्रावास के मेस में खाने में मक्खी निकलने पर कुलपति इतने आहत हुए थे कि डीएसडब्ल्यू, वार्डन, ठेकेदार, मेस मैनेजर और सहायक वार्डन को एक साथ हटा दिया गया था,मगर तीन छात्रों की आत्महत्या के मामले में क्या एक चेतावनी का पत्र भी नहीं निकला। जबकि हर छात्रावास के बच्चे की पहली जिम्मेवारी विवि प्रशासन की है, फिर डीएसडब्ल्यू की है। लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि वर्तमान में विवि के कुलपति पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। ऐसे में वर्तमान कुलपति को दोबारा नियुक्ति होने की संभावना की चर्चा है। इससे विवि का कितना भला हो सकता है?इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

locnirnay@gmail.com

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