रुद्रपुर से ज्यादा काशीपुर की हवा प्रदूषित
रुद्रपुर:तराई में दीवाली पर चाहे बच्चे,महिला हो या बुजुर्ग, हर कोई आतिशबाजी के जश्न में डूबा दिखा। मगर जिले का आबोहवा खराब हो गया। रुद्रपुर की अपेक्षा काशीपुर की हवा ज्याद प्रदूषित हो गई। जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।जिले के बाकी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की जांच की सुविधा नहीं है। वायु प्रदूषण का आंकड़ा चौंकाने वाला आया है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिला अस्पताल रुद्रपुर और एलडी भट्ट अस्पताल काशीपुर में वायु प्रदूषण मापने का यंत्र लगा रखा है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए बोर्ड की ओर से बहुत दावे किए जाते हैं।स्कूलों और सामाजिक संगठनों की ओर से कार्यशाला भी होती है।इसके बावजूद हवा शुद्ध होने का नाम नहीं ले रही है।बोर्ड कार्यालय के अनुसार 18 और 19 अक्टूबर को एक्यूआइ यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 80 से 100 रहा। जबकि 20 अक्टूबर की रात 10 से सुबह ढाई बजे तक काशीपुर में एक्यूआइ 265 और रुद्रपुर में 243 पाया गया। एक्यूआइ 201 से 300 तक होने पर लम्बे समय तक संपर्क में रहने पर श्वास लेने में परेशानी हो सकती है। 301 से 400 होने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रो ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, पार्टिकुलर मैटर सब बढ़ा है।वाहनों, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं आदि कारणों से वायु प्रदूषण बढ़ गया है। पर्यावरणविदों के अनुसार अत्यधिक आतिशबाजी से वायु प्रदूषित हुई है।शिक्षा का स्तर बढ़ने के बाद भी वायु संरक्षण के लिए जितनी गंभीरता दिखनी चाहिए, उतनी नहीं दिख रही है।पंत विवि के पर्यावरण विभाग के हेड प्रोफेसर आरके श्रीवास्तव ने बताया कि आतिशबाजी से जो वायु प्रदूषण बढ़ा है, वह दो दिन में वायु प्रदूषण के कण डिस्पर्स हो जाएंगे।जिससे प्रदूषण कम हो जाएगा। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर एमके तिवारी का कहना था कि अचानक वायु प्रदूषण बढ़ने से सांस से पीड़ित लोगों को थोड़ी दिक्कत बढ़ सकती है। दमा के भी लक्षण दिख सकते हैं।सामान्य आदमी को खांसी की शिकायत हो सकती है।इसलिए वायु प्रदूषण से बचने की जरूरत है।





