ये भगत सिंह तू जिंदा लिखा पर्चा बांटे
रुद्रपुर। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के जन्म दिवस पर सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (सीएसटीयू) की ओर से कल्याणी व्यू/रवींद्र नगर रविवार को आयोजित कार्यक्रम में भगत सिंह और साथियों के क्रांतिकारी विरासत और आज के हालात पर चर्चा हुई। भगत सिंह के विचारों की पोस्टर प्रदर्शनी और क्रांतिकारी साहित्य की प्रदर्शनी भी लगाई गई।“ये भगत सिंह तू ज़िंदा है,हर एक लहू के कतरे में!” पर्चा वितरित हुआ।
सभा में शहर के एकमात्र भगत सिंह पार्क में वर्षों से भगत सिंह की प्रतिमा न लगाने और वहां कार्यक्रमों पर रोक लगाने पर रोष प्रकट किया गया और पूर्व की भांति शहीद भगत सिंह की मूर्ति लगाने और पार्क का ताला खोलकर उसे सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सुलभ बनाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के किताबों में वह नहीं पढ़ाया जाता है, जो क्रांतिकारियों की सोच, शानदार संघर्ष और महान कुर्बानियों में था। सत्ताधारी आज ऐतिहासिक विरासत, संघर्षों और प्रतीकों को नष्ट करने की मुहिम चला रहे हैं। फासीवादी ताक़तें धर्म-जाति के नाम पर मेहनतकश को नफरत की आग में झोंककर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि जिस आज़ादी का ख्वाब भगत सिंह और उनके साथियों ने देखा था, वह आज भी अधूरा है। 1990 के बाद देश में खुले लूट का उदारवादी दौर शुरू हुआ और मिले अधिकार भी छिनते गए। पिछले एक दशक से मोदी सरकार के राज में देश की 90 फीसदी आबादी के लिए केवल तबाही मची हुई है। श्रम क़ानूनी अधिकारों को खत्म करके मालिकों के हित में चार श्रम संहिताएं लागू हो रही हैं। देश की संपत्तियां तेजी से बिक रही हैं। बुलडोजर राज चल रहा है और गरीबों के घर-रोजगार ध्वस्त हो रहे हैं। ठेका प्रथा का चौतरफा बोलबाला है। मालिकों की मनमर्जी है और फोकट में मजदूरी कराने का धंधा है। देश की 92 फ़ीसदी आबादी असंगठित क्षेत्र में है। तमाम युवा घरों में सामान डिलीवरी करने या टैक्सी चलाने वाले ऑनलाइन ड्राइवर आदि के रूप में गिग और प्लेटफार्म वर्कर है। न कोई सामाजिक सुरक्षा है न ही रोजगार की कोई गारंटी है। महंगाई और बेरोजगारी बेलगाम है। सभा में सीएसटीयू के केंद्रीय महासचिव मुकुल, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से शिवदेव सिंह, इंकलाबी मजदूर केंद्र से फिरोज खान, भाकपा माले से ललित मटियाली,गोपाल गौतम, गंगा सिंह, विकल, गोबिंद सिंह, लोकेश पाठक, संजय नेगी आदि मौजूद थे। सभा का संचालन धीरज जोशी ने किया।





