मोबाइल की दुनिया से किताबों तक, अब बच्चे रचेंगे अपनी साहित्यिक पहचान
देहरादून। (लोक निर्णय)बाल साहित्य, सृजनात्मकता और लेखन कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, देहरादून में 5-दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। 23 से 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘किताब कौतिक’ में यह कार्यशाला अल्मोड़ा से प्रकाशित प्रसिद्ध बाल पत्रिका बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति (उत्तराखंड), क्रिएटिव उत्तराखंड तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।14 से 18 अक्टूबर 2026 तक संचालित होने वाली इस कार्यशाला के पहले दिन विभिन्न विद्यालयों के कक्षा 6 से 8 तक के 35 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘ज्ञान का दीया जलाने’ समूह गीत के साथ हुई। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि एवं पूर्व अपर निदेशक (शिक्षा) एसपी. सेमवाल ने कहा कि आज के मोबाइल संस्कृति के दौर में बच्चे पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं। हमें सबसे पहले उनमें पठन-पाठन की आदत विकसित करनी होगी। बच्चों की प्रतिभा निखारने व उन्हें अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए गैर-शैक्षणिक गतिविधियां मील का पत्थर साबित होंगी। मुख्य प्रशिक्षक एवं बालप्रहरी के संपादक उदय किरोला ने बताया कि बालप्रहरी द्वारा देश के 16 राज्यों में ऐसी 350 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की झिझक दूर कर उनके भीतर छिपी मौलिक चिंतन क्षमता और लिखित व मौखिक अभिव्यक्ति कौशल को निखारना है।किताब कौतिक’ एवं क्रिएटिव उत्तराखंड के संयोजक हेम पंत ने कहा कि उत्तराखंड में जनसहयोग से 12 किताब कौतिक आयोजित हो चुके हैं। आगामी किताब कौतिक में देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की पुस्तकों के साथ-साथ इन बच्चों द्वारा तैयार 15 पृष्ठों की हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।कार्यशाला के पहले दिन बच्चों को कविता लेखन की बारीकियों से अवगत कराया गया। वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रकाश चंद्र पांडे एवं बाल साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी ने मार्गदर्शन करते हुए बताया कि आंतरिक मन के विचार ही कविता हैं और लेखन से पूर्व अध्ययन बेहद जरूरी है। बच्चों ने तुक, लय, भाव और शीर्षक के महत्व को समझा और दिए गए शब्दों पर कविताएं रचीं। इसके अतिरिक्त नाम लेखन, शब्द लेखन, पहाड़े लिखो और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों (सरोज कुमार, गायत्री कुमार, शालिनी थापला, अंशिका रावत, चंचला, नशरा प्रवीन आदि) को बाल साहित्य पुरस्कार स्वरूप भेंट किया गया। बच्चों ने रचनात्मक खेलों का भी भरपूर आनंद लिया। आज के अध्यक्ष मंडल में ईशिका, शालिनी, सरोज कुमार और साधना को शामिल किया गया। कार्यशाला का संचालन अदिति देवलोकी ने किया तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की डॉ. चंद्रकला भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट, चंद्रशेखर पांडेय, श्याम पलट पांडेय, कमलेश खंतवाल, शालिनी मनी, कीर्ति गोयल, कुसुम बर्तवाल, योगेंद्र नेगी सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





