उत्तराखंड

बेसहारा पशु छोड़ने वाले होंगे सीसीटीवी में कैद

चम्पावत।जिले में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के समुचित संरक्षण, देखरेख और पुनर्वास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला सभागार में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जनपदीय पशु क्रूरता निवारण समिति एवं गोसदन संचालन की समीक्षा की।उन्होंने नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निराश्रित पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। जहां उनकी उचित देखभाल संभव हो सके। जनपद में आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रणनीति अपनाने पर बल देते हुए जिलाधिकारी ने विशेषकर टनकपुर और बनबसा क्षेत्रों में बाहरी जनपदों से आने वाले पशुओं की निगरानी करने और इस संबंध में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पशु कल्याण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित उप जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण करें और वहां गोवंश के लिए पानी, वेंटिलेशन, चारा तथा पशु क्रूरता से बचाव के मानकों की जांच करें। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को एक ऐसी वृहद गौशाला का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है जिसकी क्षमता 500 से 1000 गोवंश की हो। जिलाधिकारी ने कार्यदाई संस्थाओं को भी हिदायत दी कि गोशालाओं का निर्माण संचालकों से समन्वय स्थापित कर ही किया जाए ताकि वे व्यावहारिक रूप से उपयोगी बन सकें। इसके साथ ही उन्होंने गोवंश के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और मुख्य मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए।जिससे लावारिस पशु छोड़ने वालों की पहचान कर उन पर चालानी करवाई की जा सके। जिलाधिकारी ने अनुशासन और उत्तरदायित्व को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए बैठक में अनुपस्थित रहने पर अधिशासी अधिकारी टनकपुर का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली बैठकों में सभी संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे और किसी को भी ऑनलाइन जुड़ने की अनुमति नहीं होगी। गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए शेड निर्माण, तारबाड़ (फेंसिंग) और सोलर लाइट्स लगाने की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बढ़ते बंदरों की संख्या से निजात पाने के लिए भी कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निराश्रित पशुओं की समस्या केवल कानून या सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक उत्तरदायित्व है जिसे सभी विभागों को आपसी समन्वय से निभाना होगा। बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल आदि मौजूद थे।

locnirnay@gmail.com

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