जानिए,किसके श्राप से रावण की मृत्यु का कारण बनी स्त्री
रुद्रपुर। पुरानी श्रीरामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम लीला मंचन के दूसरे दिन रविवार रात महापौर विकास शर्मा ने प्रभु श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि रामलीला हमारी संस्कृति, परंपरा और मर्यादाओं का जीता-जागता प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला आयोजन है। श्रीराम का चरित्र हमें सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। रामलीला मंचन में वेदवती और रावण संवाद का मंचन हुआ। वेदवती भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और उन्हें पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रही थीं। तभी रावण की दृष्टि उन पर पड़ी और वह उन्हें जबरन ले जाने का प्रयास करने लगा। तपस्या भंग होने और अपमान से आहत वेदवती ने अग्निकुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए तथा रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी।इसके बाद श्रवण कुमार की मार्मिक कथा मंचित की गई। रावण की भूमिका में रमन अरोरा, वेदवती के रूप में सुमित आनंद, श्रवण कुमार की भूमिका में पुलकित बाम्बा, माता-पिता के रूप में नरेश छाबड़ा और शांतनु मनोज मुंजाल, राजा दशरथ के रूप में प्रेम खुराना, राजा जनक के रूप में अनिल तनेजा, गुरु वशिष्ठ के रूप में मनोज मुंजाल, कौशल्या के रूप में सुमित आनंद, सुमित्रा के रूप में अग्रिम सचदेवा, कैकयी के रूप में हर्ष नरूला, सुमंत के रूप में सचिन आनंद, बालिका सीता के रूप में सीता भुड्डी और बालक राम के रूप में अनहद साहनी ने सजीव अभिनय कर मंचन को जीवंत बना दिया।





