जहां से मिली उड़ान, उसी पंत विवि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने लौटे पूर्व छात्र
पंतनगर। (लोक निर्णय) समय बदला, चेहरे बदले, जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से जुड़ी यादें और अपनापन आज भी वैसा ही है। वर्षों बाद जब देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, उद्योगों और अनुसंधान संगठनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे करीब 100 पूर्व छात्र ‘ब्रेन’ (बूस्टर रिसर्च, एकेडमिक इनोवेशन एंड नेटवर्किंग) कार्यशाला में एक साथ जुटे, तो यह केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अपने विश्वविद्यालय के प्रति कृतज्ञता, अपनत्व और गुरु-दक्षिणा की भावना का जीवंत संगम बन गया।कभी इसी परिसर में छात्र बनकर सपने देखने वाले ये पूर्व छात्र आज विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योगपति, प्रशासक और शोधकर्ता के रूप में लौटे थे। उनके चेहरे पर पुरानी यादों की मुस्कान थी और मन में एक ही भावना—”आज हम जिस मुकाम पर हैं, उसकी मजबूत नींव इसी विश्वविद्यालय ने रखी है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने अनुभव, ज्ञान और नवाचार से इस संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।”26 व 27 जून को हुई कार्यशाला में पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय के भविष्य का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। किसी ने अत्याधुनिक डाटा सेंटर स्थापित करने की जरूरत बताई, तो किसी ने पूरे परिसर को मजबूत डिजिटल नेटवर्क, हाई-स्पीड वाई-फाई और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव दिया। सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं, अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं और उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी पर भी जोर दिया गया।विशेषज्ञों का मानना था कि पंत विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि कृषि परिवर्तन का राष्ट्रीय केंद्र बन सकता है। इसके लिए अनुसंधान, तकनीक, उद्योग और किसानों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना होगा। उनका विश्वास था कि सही दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाएं तो पंत विश्वविद्यालय विश्व के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों की कतार में अपनी अलग पहचान बना सकता है।पूर्व छात्रों ने विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल नौकरी पाने वाले छात्र तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे युवा तैयार किए जाएं जो स्टार्टअप, कृषि उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से स्वयं रोजगार सृजित करें और दूसरों को भी रोजगार दें। इससे कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी और किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।इस पूरे आयोजन का सबसे भावनात्मक पहलू यह रहा कि सुझाव देने वाले अधिकांश लोग उसी परिसर के विद्यार्थी रह चुके थे। इसलिए उनके सुझावों में केवल विशेषज्ञता ही नहीं, बल्कि अपने विश्वविद्यालय के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी भी साफ दिखाई दी। ऐसा लगा मानो वे अपने पुराने घर को और मजबूत बनाने के लिए लौटे हों।इस आयोजन की एक और खास बात रही कि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप स्वयं इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। वे यहां प्रोफेसर, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता और अब कुलपति के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में पूर्व छात्रों और कुलपति के बीच संवाद किसी औपचारिक बैठक जैसा नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह विश्वविद्यालय के भविष्य पर विचार-विमर्श का मंच बन गया। हर सुझाव में पंत विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का साझा संकल्प और अपनापन झलकता रहा।’ब्रेन’ कार्यशाला ने यह संदेश भी दिया कि किसी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी उसकी इमारतें नहीं, बल्कि उससे निकले वे विद्यार्थी होते हैं जो सफलता हासिल करने के बाद फिर उसी संस्थान को संवारने के लिए लौटते हैं। पंत विश्वविद्यालय में पूर्व छात्रों की यह पहल इसी भावना का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। यह आयोजन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान दिलाने के सामूहिक अभियान की मजबूत शुरुआत बन गया।





