ऊधम सिंह नगर

छात्र विवेक की मौत से हिला पंत विवि,आत्महत्याओं की कड़ी कब टूटेगी?

पंतनगर :जिंदगी और मौत से जूझ रहा छात्र विवेक कुमार आर्य आखिरकार हार ही गया।इसकी खबर लगते ही पंत विवि शोक में डूब गया और विवेक के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है।पंतनगर विश्वविद्यालय में एक बार फिर छात्र की मौत ने शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर देश के प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालयों में शामिल पंत विवि में छात्र किस दबाव और परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल फाइनल ईयर के छात्र विवेक ने सोमवार की रात विश्वेश्वरय्या हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। आनन फानन उसके साथियों और शिक्षकों ने जिला अस्पताल रुद्रपुर में विवेक को भर्ती कराया।जहां डॉक्टरों ने गंभीर बताकर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। विवेक को रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।जहां इलाज के दौरान शनिवार देर रात विवेक ने दम तोड़ दिया। विवेक मूल रूप से ब्यासी गरमपानी कौशिया कुटोली नैनीताल का रहने वाला था।सोमवार तड़के सिविल इंजीनियरिंग के छात्र अक्षत सैनी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।इससे पहले 12 सितंबर को इंजीनियरिंग के छात्र नीरज ने भी आत्महत्या कर ली थी। क्या केवल शोक संदेश पर्याप्त हैं, या छात्रों की मानसिक सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जरूरत है?, चार माह में तीन मौतों पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए? क्या विश्वविद्यालय में प्रभावी काउंसलिंग की जाती है?, छात्रों पर पढ़ाई या करियर के बढ़ते दबाव की जिम्मेदारी किसकी है?,क्या हॉस्टल और कैंपस में छात्रों की नियमित मानसिक स्थिति की मॉनिटरिंग होती है?, पहले हुई आत्महत्याओं के बाद बनी जांच रिपोर्टों पर क्या कार्रवाई हुई?, क्या विश्वविद्यालय में छात्र-शिक्षक संवाद की व्यवस्था कमजोर पड़ गई है?,क्या पंत विवि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को केवल व्यक्तिगत समस्या बताकर टाल रहा है?ऐसे तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं।आत्महत्या की घटनाओं से हरित क्रांति की जन्म स्थली का श्रेय लेने वाले और खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने वाले देश के पहले पंत कृषि विवि की छवि खराब हो रही है।यह घटनाएं विवि को झकझोर कर रख दिया है और हर कोई सदमे में नजर आ रहा है।अब देखना है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए विवि प्रशासन क्या कदम उठाता है।जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर ईश कुमार डल्ला ने बताया कि यदि किसी तरह का मानसिक दबाव,अवसाद के लक्षण दिखे तो इसे परिवार या दोस्तों से शेयर करें। साथ ही मनोचिकित्सक से संपर्क करें।रोजाना व्यायाम और प्राणायाम भी करें।

locnirnay@gmail.com

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